आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव में मिली प्रचंड जीत के बाद भाजपा के सभी केंद्रीय पदाधिकारी और मंत्री दिल्ली पहुंच गए हैं। बताया जा रहा है कि वहां आज देर शाम तक भाजपा संसदीय दल की बैठक हो सकती है। बैठक में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के मुख्यमंत्री के नाम पर चर्चा हो सकती है।

मप्र की 163 सीटें जीतकर बीजेपी ने दो तिहाई से ज्यादा बहुमत हासिल किया है। अब सीएम को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। मौजूदा सीएम शिवराज सिंह चौहान सहित आधा दर्जन नेता सीएम पद के दावेदार हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि बीजेपी ने इस बार किसी एक नेता को सीएम का चेहरा नहीं बनाया। बल्कि, सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ा और थीम रखी “एमपी के मन में मोदी….मोदी के मन में एमपी” अब बहुमत मिलने के बाद नए मुख्यमंत्री का फैसला होना है।

आज से शुरू हो रहा संसद के शीतकालीन सत्र

संसद का शीतकालीन सत्र आज से शुरू हो रहा है। इसमें भाग लेने के लिए केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रहलाद पटेल रविवार को ही दिल्ली पहुंच गए थे। एमपी से विधानसभा का चुनाव जीते नरेंद्र सिंह तोमर और प्रहलाद पटेल सीएम की रेस में हैं। जबकि ज्योतिरादित्य सिंधिया, कैलाश विजयवर्गीय, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा भी मुख्यमंत्री के दावेदार हैं।

शाम को हो सकती है संसदीय दल की बैठक

आज शाम को दिल्ली में बीजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक हो सकती है। इस बैठक में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों को लेकर चर्चा हो सकती है। एमपी के प्रदेश प्रभारी भूपेंद्र यादव और सह प्रभारी अश्विनी वैष्णव एमपी को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा से चर्चा कर सकते हैं।

बीजेपी नियुक्त करेगी पर्यवेक्षक

मप्र के मुख्यमंत्री को लेकर बीजेपी जल्द ही पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर सकती है। ये पर्यवेक्षक एमपी के विधायक दल की बैठक लेकर विधायक दल के नेता का चयन करेंगे। इसी बैठक के बाद एमपी का मुख्यमंत्री तय हो जाएगा।

केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों पर होगा फैसला

एमपी के विधानसभा चुनाव में दो केंद्रीय मंत्री सहित कुल 5 सांसदों ने जीत हासिल की है। अब इन मंत्री और सांसदों को अपनी संसद की सदस्यता 14 दिनों के अंदर छोड़नी होगी। यदि वे संसद की सदस्यता नहीं छोड़ते हैं तो 14 दिनों के बाद अपने आप सदस्यता समाप्त हो जाएगी। ऐसे में संभव है कि दो केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल, नरेंद्र सिंह तोमर और सांसद राकेश सिंह, रीति पाठक व राव उदय प्रताप सिंह संसद की सदस्यता से इस्तीफा दे दें। क्योंकि, अगले पांच महीनों में लोकसभा के चुनाव होने हैं।

शिवराज को मिलेगा पांचवां कार्यकाल

साल 2003 में बीजेपी ने दिग्विजय सिंह की सरकार को परास्त कर एमपी की 165 सीटें जीतकर रिकॉर्ड बनाया और सत्ता में काबिज हुई। सीएम बनी उमा भारती और फिर उनके इस्तीफे के बाद बाबूलाल गौर और उनके बाद 2005 में मप्र के मुख्यमंत्री बने शिवराज सिंह चौहान… 2003 में सत्ता में आने के बाद से लगातार 2008, 2013 के चुनाव जीतते हुए 2018 तक बीजेपी सरकार में रही।

15 साल बाद उलटफेर हुआ और कांग्रेस सत्ता में आई, लेकिन कमलनाथ के नेतृत्व में बनी सरकार महज 15 महीने ही चल पाई। और दलबदल के बाद शिवराज सिंह चौहान चौथी बार मुख्यमंत्री बन गए। इस बार बीजेपी को 2003 जैसी जीत मिली है। अब मप्र के मुख्यमंत्री को लेकर जनता के मन में सवाल उठ रहे हैं। सवाल भी इसलिए क्योंकि बीजेपी ने इस बार किसी एक नेता को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किए बिना सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ा।