आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़: भोपाल। मध्यप्रदेश नर्सिंग काउंसिल के 200 नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता रद्द कर दी है। नर्सिंग काउंसिल ने चिकित्सा शिक्षा मंत्रालय को सूची भेज दी है। इससे प्रदेश के करीब एक लाख से भी ज़्यादा नर्सिंग छात्र-छात्राओं का भविष्य संकट में आ गया है। नर्सिंग काउंसिल ने ये कार्रवाई सत्र शुरू होने के एक साल बाद की है नर्सिंग कॉलेजों से सम्बद्ध अस्पतालों का फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई। सबसे ज्यादा भोपाल और ग्वालियर संभाग के कॉलेज इससे प्रभावित हुए हैं।
दरअसल नर्सिंग कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की क्लीनिकल ट्रेनिंग के लिए अस्पताल की जरूरत होती है, लेकिन नर्सिंग कॉलेज संचालकों ने अस्पताल कागजों पर ही खोल लिए थे। 100 बेड के अस्पताल पर क्लीनिकल ट्रेनिंग के लिए कॉलेज को 30 विद्यार्थी को पढ़ाने की अनुमति होती है, इसमें द्वितीय और तृतीय वर्ष के बच्चे भी क्लीनिकल ट्रॉयल करते हैं। इस तरह एक बेड पर एक छात्र-छात्रा को सीखने का मौका मिलता है। अब मान्यता निरस्त होने के बाद जिस कॉलेज में बंद होने वाले कॉलेजों के बच्चों को समायोजित किया जाता है, वहां अस्पताल की सीट और बच्चों के अनुपात का मानक टूटेगा।
यह मामला कोरोना के समय प्रकाश में आया, जब कोरोना संक्रमित मरीजों को भर्ती कराने के लिए इन अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाएँ नदारद मिली। इसके बाद नर्सिंग काउंसिल ने नर्सिंग कॉलेजों की जांच करवाई है। जाँच में करीब 200 नर्सिंग कॉलेजों में नर्सिंग कॉउंसिल के क्लीनिकल ट्रेनिंग के लिए सम्बद्ध अस्पताल और प्रशिक्षण में कमी पाई जिसके बाद ये कार्रवाई की गई। कॉलेजों में पूर्व से पढ़ रहे विद्यार्थियों को कहां समायोजित किया जाएगा इसके बारे में अभी तक काउंसिल ने कोई निर्णय नहीं लिया है।