आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : प्रदेश के वन महकमे में एक रेंजर के पास चार से पांच फाॅरेस्ट रेंज का प्रभार अधिकारियों ने सौंप रखा है। जबकि करीब 450 डिप्टी रेंजर कार्यवाहक रेंजर बनने के लिए शासन के आदेश का इंतजार हैं। इस बीच प्रमोशन पाने और सेवानिवृत्ति के पहले अपने नाम के साथ रेंजर पदनाम लिखवाने की उम्मीद पाले तीस से अधिक डिप्टी रेंजर रिटायर भी हो गए हैं।
इनकी पदोन्नति में नहीं हुई कोई दिक्कत
वन अफसरों के मुताबिक फील्ड में पदस्थ रेंजर सबसे अधिक कमाई वाला पद होता है। इसलिए इस पद पर काबिज अफसर प्रमोट नहीं होना चाहते और वरिष्ठ अधिकारी इनसे मिलकर निचले स्तर से प्रमोट होने वाले डिप्टी रेंजर्स को पदोन्नत होने से रोक रहे हैं। वन महकमे द्वारा वन रक्षकों को पदोन्नत कर वन पाल बना दिया गया। रेंजर्स को एसडीओ फारेस्ट बना दिया लेकिन डिप्टी रेंजर्स को रेंजर नहीं बनाया जा रहा है। इसके अलावा विभाग में अपर लेवल के पदों पर भी पदोन्नति देने में कोई कमी नहीं रखी जा रही है। ये अधिकारी भी समय पर पदोन्नत हो रहे हैं।
मार्च से चल रहा फाइल का मूवमेंट
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार डिप्टी रेंजर्स को कार्यवाहक पदोन्नति देने और रेंजर की फील्ड पोस्टिंग देने के लिए वन महकमे में मार्च 2023 से फाइल मूव हो रही है। इस पर 8 अगस्त को वन मंत्री विजय शाह का अनुमोदन भी हो चुका है लेकिन आदेश नहीं जारी हो पाए हैं। इस बीच वन भवन और वन मंत्रालय के अफसरों की लेटलतीफी के बाद चुनाव आयोग से परमिशन लेकर आदेश जारी करने की बात वरिष्ठ अधिकारियों ने कही लेकिन चुनाव आयोग भी इसका प्रस्ताव नहीं भेजा गया और अब नई सरकार के गठन की स्थिति के चलते डिप्टी रेंजर्स को आशंका है कि फिर फाइलें रोक दी जाएंगी।
बस नाम शार्टलिस्ट कराते हैं अफसर
अफसरों की मिलीभगत से अटकी कार्यवाहक प्रभार देने की पदोन्नति सूची को अपडेट कराने का काम भी इस दौरान अधिकारियों ने किया है। मार्च से अब तक तीस से अधिक डिप्टी रेंजर रिटायर हो गए हैं तो उनके नाम शार्ट लिस्ट कराने का काम भी कराया गया है और अब सब कुछ कम्प्लीट होने के बाद भी फाइल को पेंडिंग रखने का काम किया जा रहा है। इसके चलते 452 पात्र डिप्टी रेंजर्स को कार्यवाहक पदोन्नति मिलने में देरी होती जा रही है।
इसलिए नहीं छोड़ना चाहते रेंज
वन अफसरों के अनुसार रेंजर को हर माह लाखों रुपए की अतिरिक्त कमाई होती है। इस कारण से वे पद नहीं छोड़ना चाहते और वरिष्ठ अधिकारी उन्हें इन पदों पर बनाए रखने में सहयोग कर रहे हैं। अभी अगले माह 31 दिसम्बर के बाद से फायर लाइन कटिंग होने वाली है। इसके लिए हर साल भारी भरकम फंड विभाग जारी होता है। इसलिए अधिकारी इस पद पर बने रहना चाहते हैं। दूसरी ओर कुछ डिप्टी रेंजर ऐसे भी सामने आए हैं जो 2014 में रेंजर बनने की पात्रता रख रहे थे। इस बीच पदोन्नति में हुई देरी के बाद 2016 से पदोन्नति ही रोक दी गई और इसके बाद से सात साल तक का समय बीत गया है पर ये डिप्टी रेंजर ही बने रहने को मजबूर हैं।