आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : लोकतंत्र का महापर्व विधानसभा चुनाव जहां हर किसी को अपने वोट का अधिकार करना होता है। पर इस चुनाव से किसानों को खासा नुकसान हुआ है। वजह यह है कि विधानसभा चुनाव के कारण मजदूर अपने-अपने गांव चले गए, जिस वजह से मटर की फसल तोड़ने के लिए किसानों को मजदूर नहीं मिलें, लिहाजा खेत में लगी-लगी खड़ी फसल टूट नहीं पाई और सूख गई। जिसके कारण किसानों को खासा नुकसान हुआ है। जैसे-तैसे किसानों ने किसी तरह खेत से मटर तोड़ा और मंडी लेकर आए पर वहां भी किसानों को रेट नहीं मिला। ऐसे में अब किसान अपनी लागत तक नहीं निकाल पा रहें है। शुरुआती सीजन में जिस मटर का रेट किसानों को 40 से 50 रुपए प्रति किलो मिलता था। मंडी में आज उस मटर की कीमत 12 से 22 रुपए प्रति किलो थोक में किसानों को मिल रहीं है। जबकि यही मटर फुटकर बाजार 50 से 60 रुपए प्रति किलो मिल रहा है। किसानों का कहना है कि एक तो विधानसभा चुनाव दूसरा बेमौसम बरसात ने उनकी फसल बर्बाद कर दी है।
मजदूर ना मिलने से मटर की नहीं हो पाई तुड़ाई, सूख गई फसल।
जबलपुर मटर की बंफर आवक का क्षेत्र है। जिले के पाटन, शहपुरा,कटंगी, मंझोली में मटर की फसल लगाई जाती है। और फिर यही से मटर जबलपुर के अलावा अन्य जिले और राज्यों में जाते है। जबलपुर की दमोह नाका कृषि उपज मंडी में भी मटर की खूब आवक हो रहीं है। किसान मंडी में आकर मटर की फसल बेचते है, और फिर यही से महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, छतीसगढ़, तेलंगाना सहित कई राज्यों में सप्लाई होती है। किसान मनीष दुबे का कहना है कि चुनाव के कारण मजदूर अपने-अपने घर चले गए थे, इस वजह से खेत में मटर फसल की तुड़ाई नहीं हो पाई। और फसल लगी-लगी सूख गई। फसल सूखने से दाम कम मिले। और ना चाहते हुए भी व्यापारियों को कम दामों में माल देना पड़ा। मनीष का कहना है कि 10 एकड़ में मटर लगाया था। बरसात, गर्मी और फिर मजदूर ना मिलने के कारण खेत में पड़ी-पड़ी फसल सूख गई।
लागत से भी कम दामों में बेचने को मजबूर है अपनी फसल किसान।
मनखेड़ी गांव से मटर की फसल बेचने जबलपुर कृषि उपज मंडी आए किसान इंद्रपाल लोधी का कहना है कि हमने 50 एकड़ में मटर का फसल लगाई थी। सोचा था इस बार मटर का अच्छा रेट मिलेगा पर मौसम के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों के नुकसान पर कोई ना ही ध्यान देता है, और ना ही कोई समझ सकता है। इंद्रपाल का कहना है कि जिस फसल को व्यापारी हमसे 20 से 25 रुपए प्रति किलो के हिसाब से खरीदता है, वही मटर बाजार में दुगना रेट 50 से 60 रुपए प्रति किलो बिकता है। इंद्रपाल का कहना है कि हर साल मटर तुड़ाई के लिए मजदूर मिल जाते थे। मजदूर प्रति किलो 3 रुपए लिया करते थे। पर इस बार चुनाव के कारण मजदूर मिलें नही। और जो मिलें भी तो उन्होंने तीन गुना दाम देना पड़ा।
जबलपुर में रोजाना 20 से 30 हजार क्विंटल आ रही है हरी मटर बाजार में।
मटर के दामों में गिरावट को लेकर किसान जहां खराब मौसम और मजदूर का मिलना बता रहें है। वही व्यापारियों का कहना है कि मटर कि बम्फ़र आवक हो रहीं है। इस वजह से दाम कम है। मटर व्यापारी अनुराग दुबे का कहना है कि जबलपुर कृषि मंडी में रोजाना 20 से 30 हजार क्विंटल कि रोजाना आवक हो रहीं है। इलेक्शन के कारण समय से मजदूर नहीं मिलें, और फसल टूटी नहीं। अब जब मजदूर मिलें है तो खेतों में मटर की तुड़ाई खूब हो रहीं है। जिस वजह से दाम कम हो गए है। और हरा मटर सूख गया है।
जबलपुर जिले में करीब 80 से 90 हजार हेक्टर में मटर की फसल बुवाई की जाती है। जिले के शहपुरा, शहजपुर, पाटन, बरगी, मझौली पनागर, सिहोरा में मुख्यतः फसल को लगाया जाता है। चाहे कांग्रेस हो या फिर भाजपा दोनों ही राजनीतिक पार्टियों ने हरे मटर को खूब चुनावी मुद्दा बनाया। अपने एक भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने l कहा था कि जबलपुर में मटर का प्रोसेसिंग प्लांट लगाया जाएगा। हालांकि यह सिर्फ एक चुनावी दावा था। वही कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने भी अपनी अपनी जनसभा में वादा किया है कि अगर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आई तो पाटन में मटर प्रोसेसिंग प्लांट लगाया जाएगा। पर अब किसान भी इन राजनीतिक बयानों को अच्छी तरह से समझ चुके।