आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मध्यप्रदेश, राजस्थान, और छत्तीसगढ़ में चुनावों से पहले दैनिक भास्कर ने महिलाओं के बीच सबसे बड़ा सर्वे किया है। इसमें 10 हजार 955 महिलाओं ने भाग लिया। सर्वे के नतीजों के मुताबिक मप्र की 46% महिलाओं का मानना है कि मुफ्त की घोषणाएं दलों को ज्यादा वोट दिला सकती हैं। हालांकि, 81% महिलाओं का मानना है कि राजनीतिक दलों को चुनाव के समय ही उनसे जुड़े मुद्दे याद आते हैं।

41% के अनुसार आरक्षण सिर्फ राजनीतिक परिवारों की महिलाओं की राह आसान करेगा। जबकि 30% का मानना है कि इससे आम महिलाओं को भी मौके मिलेंगे। सर्वाधिक 35% महिलाओं ने माना कि आत्मनिर्भरता बढ़ना उनके लिए सुरक्षा और महंगाई से बड़ा मुद्दा है। प्रदेश में सिर्फ 14% महिलाएं ही अपनी सुरक्षा को लेकर संतुष्ट हैं। जबकि 46% असंतुष्ट। इनमें से 24% के मुताबिक प्रदेश में सुरक्षा की स्थिति खराब है। 22% के अनुसार महिला सुरक्षा पर सरकार गंभीर नहीं है।

1) क्या महिला आरक्षण से राजनीति में आम महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी? या यह सियासी परिवारों की महिलाओं के लिए एक प्लेटफाॅर्म बनकर रह जाएगा?

41 फीसदी महिलाओं ने माना कि सियासी परिवारों की महिलाओं को ही मौके मिलेंगे।

09 फीसदी महिलाओं के अनुसार जाति के आधार पर ज्यादा मौके दिए जाएंगे।

07 फीसदी का मानना है कि आर्थिक तौर पर मजबूत महिलाएं ही आगे आएंगी।

30 फीसदी महिलाओं के मुताबिक आरक्षण से आम महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी।

13 फीसदी महिलाएं इस बारे में तय तौर पर कुछ नहीं कह सकती हैं।

2) क्या महिलाओं के लिए मुफ्त की घोषणाएं दलों को ज्यादा वोट दिला सकती हैं?

46% महिलाओं ने ‘हांं’ कहा।

39% महिलाओं ने इस बात को नकारा कि मुफ्त की घोषणाएं दलों को ज्यादा वोट दिला सकती हैं।

15% इस बारे में कुछ नहीं कह सकती हैं।

3) प्रदेश की महिलाओं के लिए इनमें से सबसे जरूरी मुद्दा क्या है?

23% के लिए महंगाई सबसे जरूरी मुद्दा है।

17% के लिए महिला सुरक्षा जरूरी।

25% के लिए रोजगार के अवसर जरूरी।

35% के लिए आत्मनिर्भरता बढ़ना जरूरी।

4) प्रदेश की महिलाएं वोट के लिए खुद को कितना स्वतंत्र मानती हैं?

81 फीसदी महिलाओं के मुताबिक वे चुनाव में अपनी मर्जी से ही वोट देती हैं।

16 फीसदी परिवार की भी राय मानती हैं।

3 फीसदी परिवार की मर्जी से वोट देती हैं।

5) इस विधानसभा चुनाव में आप अपना वोट इनमें से किस आधार पर देंगी?

14% पार्टी को देखकर वोट देंगी।

4% महिला प्रत्याशी को वोट देंगी।

12% पार्टी की घोषणाओं पर वोट देंगी।

70% बेहतर प्रत्याशी को वोट देंगी।

6) क्या एक जनप्रतिनिधि के तौर पर महिलाएं पूरी स्वतंत्रता के साथ निर्णय ले पाने में सक्षम होती हैं?

27% के मुताबिक स्वतंत्र होती हैं।

43% ने कहा ‘नहीं होती’, पुरुष दखल देते हैं।

30% ने कहा यह परिस्थिति पर निर्भर करता है।

7) क्या आप महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य की सरकार द्वारा किए गए प्रयासों से संतुष्ट हैं?

14% सुरक्षा व्यवस्था से पूरी संतुष्ट हैं।

40% संतुष्ट, पर सुधार की गुंजाइश है।

24% महिलाएं सुरक्षा स्थिति खराब मानती हैं।

22% सुरक्षा पर सरकार को गंभीर नहीं मानती।

8) चुनाव में राजनीतिक दल महिलाओं को लुभाने के लिए तमाम घोषणाएं कर रहे हैं, क्या आप इनसे प्रभावित होंगी?

15% हां

63% नहीं

7% महिलाएं इस बारे में नहीं कह सकती।

15% ने कहा कि योजना पर निर्भर करता है।

9) सरकार की कौन-सी योजना कितनी पसंद है?

रेटिंग (1 सबसे अच्छी 5 सबसे खराब) 1 2 3 4 5

लाड़ली बहना 42% 10% 12% 12% 24%

लाड़ली लक्ष्मी 28% 11% 14% 17% 30%

गैस सिलेंडर 36% 11% 14% 15% 24%

मुफ्त स्कूटी-लैपटॉप 36% 11% 14% 16% 23%

महिला सशक्तिकरण 30% 11% 15% 17% 27%

कन्या विवाह 28% 10% 15% 18% 29%

10) आप अपने परिवार में होने वाली राजनीतिक चर्चाओं में कितनी बार शामिल होती हैं?

46% अक्सर

42% कभी-कभार शामिल होती हैं

9% कभी नहीं

3% को बोलने ही नहीं दिया जाता

11) क्या आप किसी उम्मीदवार को सिर्फ उसके महिला होने के नाते चुनाव में प्राथमिकता देंगी?

14% हां

25% नहीं

8% पार्टी देखकर फैसला ।

53% महिलाओं के मुताबिक- उम्मीदवार पर निर्भर करता है।