सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ द्वारा कृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व धूमधाम से मनाया गया इस अवसर पर छात्राओं को प्राचीन भारतीय परंपरा से अवगत कराने के लिए मुख्य वक्ता के रूप में माता सत् विद्यानंद स्वामिनी उपस्थिति रही। सभी अतिथियों का स्वागत मोर पंख एवं पुष्प गुच्छ से किया गया अतिथियों का स्वागत करते हुए प्राचार्य डॉक्टर प्रतिमा यादव ने श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर कृष्ण के एक अनछुए पक्ष पर प्रकाश डालते हुए राधा रुक्मणी संवाद के माध्यम से बताया कि इनका कृष्ण के प्रति प्रेम अलौकिक है कृष्ण की गाथा अध्ययन नहीं एक चिंतन है ।जो प्रेम में माधव, कर्म में योगेश्वर और संकट में सारथी हैं। यह हमारे वर्तमान जीवन में मार्गदर्शक प्रेरणा स्रोत हो सकते हैं। मुख्य वक्ता माता सत् विद्यानंद स्वामिनी ने कृष्ण के कर्म पक्ष पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विद्यार्थी अपने व्यक्तित्व का निर्माण स्वयं करता है यह समय सीखने का है हर व्यक्ति को कर्म करने की स्वतंत्रता है जो बीत गया उसका नहीं भविष्य का चिंतन कर अपने बहु आयामी व्यक्तित्व का विकास करें। कार्यक्रम का उद्देश्य बताते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ की प्रभारी डॉक्टर निशा जैन ने कहा कि आज विद्यार्थी अपने भविष्य , कैरियर की चिंताओं के कुरुक्षेत्र में फंसा हुआ है ।तनाव और अवसाद से चारों ओर घिरा हुआ है। ऐसे में अपने भीतर छिपे कृष्ण को गीता के ज्ञान से पहचाने और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़े ।कृष्ण जन्मोत्सव कार्यक्रम में कृष्ण की झांकी चित्रकला विभाग से डॉक्टर अंजली आरख द्वारा सजाई गई भक्ति संगीत की प्रस्तुति संगीत विभाग के डॉक्टर नीना श्रीवास्तव एवं उनके विद्यार्थियों द्वारा दी गई डॉक्टर रिचा पाठक द्वारा नृत्य विभाग से छात्रों की सुंदर प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम में फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें छात्राओं ने कृष्ण और राधा बनकर के सुंदर प्रस्तुति मंच पर दी। निर्णायक की भूमिका डॉ प्रीति पचोरी, डॉक्टर श्रद्धा दुबे ,डॉक्टर भावना रमैया रही प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर दीक्षा कुशवाहा द्वितीय स्थान पर कनिष्का सोनी और तृतीय स्थान पर स्वरा दामले रही शेष छात्रों को सांत्वना पुरस्कार दिए गए कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ से डॉक्टर अपर्णा बादल, डॉ प्रीति पचौरी ,डॉक्टर कल्पना जमोलकर ,डॉक्टर प्राची सिंह ,डॉक्टर नूतन केवट, डॉ गोविंद मंसूरे एवं बड़ी संख्या में छात्राएं और समस्त महाविद्यालय परिवार उपस्थित रहा। कार्यक्रम के आरंभ में स्वागत वक्तव्य देते हुए पीजीडीएवी कॉलेज (सांध्य), दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और ‘साहित्यायन’ के संरक्षक व मार्गदर्शक प्रो. हरीश अरोड़ा ने कहा कि ‘साहित्यायन’ का उद्देश्य केवल साहित्य अथवा भाषा तक सीमित रहना नहीं है। यह संस्था भाषा, साहित्य, कला और संस्कृति को समन्वित रूप से आगे बढ़ाते हुए विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों तथा समाज के बीच संवाद स्थापित करेगी।उन्होंने कहा कि संस्था ऑनलाइन कार्यक्रमों के साथ भविष्य में प्रत्यक्ष कार्यक्रमों का भी आयोजन करेगी।

कार्यक्रम का संचालन दिल्ली विश्वविद्यालय के शोधार्थी अविरल अभिलाष मिश्र ने किया। आयोजन में डॉ. प्रभाकर कुमार, दिनेश कौशिक, साक्षी, हंसराज, सहदेव सिंह, नितेश कुमार पांडेय, हरीश चौधरी, राजेंद्र पाल, रेशमी कुमारी, प्रवीण त्रिपाठी, विश्वानी मिश्रा, शुभम शास्त्री और लव कुमार पांडेय की संयोजन समिति की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही।


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