आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बीजेपी प्रत्याशियों का प्रचार करने भोपाल आई हुई हैं। उन्होंने कहा, कमलनाथ महिलाओं की चीख-पुकार की बात करते हैं। वे सबसे पहले सिखों की पुकार सुन लें। उन्होंने कहा कि 5G के कारण मध्य प्रदेश बेमिसाल है।

बिहार के सीएम नीतीश कुमार के विधानसभा में दिए गए बयान पर उन्होंने कहा कि शर्मनाक स्टेटमेंट है। दुख का विषय है कि विपक्ष के नेता निंदा करने की जगह सपोर्ट कर रहे हैं। ये लोग महिलाओं को वोट बैंक समझते हैं।

एमपी में कर्ज की स्थिति कम हुई

मप्र द्वारा कर्ज का ब्याज अदा करने और लोन लेने के सवाल पर सीतारमण ने कहा- जब आप टोटल लोन का एब्सलूट अमाउंट लेकर बात करते हैं कि राज्य पर इतना लोन है। तो उसका कॉन्टेक्स्ट छिप जाता है। इसलिए जीडीपी के साथ जोड़कर जब आप देखेंगे कि आपका लोन कितना है। इसकी जीडीपी से तुलना करने में सही आंकड़ा दिखाई देगा। ऋण के मामले में मध्य प्रदेश की अच्छी तरक्की दिख रही है। जीडीपी के लेवल पर देखने में ऋण की स्थिति कम ही हुई है।

मप्र ने 20 साल में काफी तरक्की की

उन्होंने कहा कि मप्र ने साल 2003 से अब तक काफी तरक्की की है। मप्र में जब भाजपा की सरकार आई थी, तब इस प्रदेश को बीमारू प्रदेश कहा जाता था। लेकिन, अब मप्र बेमिसाल राज्य बन गया है। सामाजिक न्याय का विषय हो, राज्य की तरक्की, इंडस्ट्री और एग्रीकल्चर का मामला हो। इन विषयों पर एक-एक करके आंकड़े देखेंगे तो मध्यप्रदेश की प्रोग्रेस दिखती है। देश की तरक्की में भी मध्यप्रदेश का योगदान साफ दिखता है। कर्नाटक के हाल देख लीजिए। गरीब, महिला, दलित को इन्क्लूसिव ग्रोथ में जोड़ना चाहिए। इसलिए मप्र का उदाहरण अनुपम है। इसका श्रेय भाजपा की सरकार को जाता है। इस गवर्नेंस के पांच सूत्र हैं। 5जी के मंत्र हैं ग्रोथ। इन 5G के कारण मप्र बेमिसाल मप्र हो गया है।

ग्रोथ

गुड गवर्नेंस अच्छी सरकार

गुड विल जनता की शुभेच्छा

गारंटी मोदी की

गरीब कल्याण

प्रदेश की पर कैपिटा इनकम बढ़ी

उन्होंने कहा कि मप्र का पर कैपिटा इनकम 2002 में 11 हजार के करीब था। आज 12 गुना बढ़कर 1.40 लाख हो गई है। बीमारू से बाहर आने का उदाहरण है। 2002 में स्टेट का ऋण जीडीपी के सापेक्ष 31.6 फीसदी था। लेकिन वह कम होकर 27.8% हो गया है। स्टेट की केन्द्र और राज्य का टैक्स में बंटवारा। टैक्स डेव्यल्यूशन वित्त आयोग तय करता है। फाइनेंस कमीशन परसेंटेज तय करता है। दस साल 2004 से 2014 तक यूपीए की सरकार में मप्र को सिर्फ 1.28 लाख करोड़ रूपया ही मिलता था। लेकिन 2014 से लेकर अब तक मप्र को 5 लाख करोड़ रूपए मिलते हैं। यूपीए के कार्यकाल में ग्रांट्स के रुप में 71 करोड मिलता था। अब 2.7लाख करोड़ मिलता है।

लाड़ली बहन योजना की नकल कर रहे दूसरे प्रदेश

उन्होंने कहा, जब से प्रदेश की महिलाओं को लाड़ली बहन योजनाओं का लाभ मिलना शुरू हुआ, तब से महिलाओं का जीवन स्तर बदल गया है। पहले लाड़ली लक्ष्मी योजना संबल योजना के बाद अब लाड़ली बहन योजना मध्य प्रदेश ने शुरू की है। यहां महिलाओं को केंद्र में रखते हुए योजनाएं बनाई जा रही हैं। कई दूसरे राज्य भी मध्य प्रदेश की इस योजना को लागू कर रहे हैं।