आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : कांग्रेस के सभी नेता एक सुर में बार-बार मांग कर रहे हैं कि जाति जनगणना होनी चाहिए। आखिर इसका मकसद क्या है? पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने दैनिक भास्कर से इंटरव्यू में कहा कि आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा को तोड़ना होगा, इसे और बढ़ाना होगा। जब उनसे पूछा गया कि क्या ये आरक्षण नौकरियों के साथ राजनीति में भी हाेना चाहिए?
उनका जवाब था- हां। वे बोले, राजनीति में भी सामाजिक न्याय व बराबरी, इस संकल्प का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाने वाली कांग्रेस के लगभग सभी मुख्यमंत्री ईडी-सीबीआई-इनकम टैक्स की जांच के दायरे में क्यों हैं? महिलाओं को आरक्षण की पहल कांग्रेस पार्टी स्तर पर क्यों नहीं कर रही?
ऐसे तमाम सवालों पर खड़गे से विस्तार से बातचीत
हिंदुत्व पर
प्रश्न: क्या कांग्रेस हिन्दुत्व की राह पर है?
भारत का संविधान और देश का तिरंगा हमारा सबसे बड़ा धर्म है। भगवान की भक्ति और अपने-अपने तरीके से ईश्वर में आस्था की स्वतंत्रता भारत के संविधान में निहित है। राहुल गांधी कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाएं या बाबा केदारनाथ के दर्शन को जाएं तो भाजपा को तकलीफ है। उन्हें अपनी इस कुंठा से बाहर आने की जरूरत है।
इंडिया गठबंधन पर
प्रश्न: क्या ‘इंडिया’ गठबंधन बिखर रहा है ?
’इंडिया’ गठबंधन देश के लिए है, देश के 140 करोड़ लोगों के लिए है। आज मोदी सरकार ने भारत के संविधान व संवैधानिक मूल्यों और संस्थाओं पर हमला बोल रखा है। हम सब सैद्धांतिक तौर से इकट्ठे हैं और मिलकर लड़ेंगे। कभी-कभी प्रांतीय स्तर पर उम्मीद के मुताबिक समझौता न हो पाने से भिन्न-भिन्न आवाजें आएंगी, पर हम मिल बैठकर हल निकालेंगे।
भ्रष्टाचार के आरोपों और ईडी की कार्रवाई पर
प्रश्न: सभी कांग्रेसी सीएम ईडी-सीबीआई की जांच के घेरे में हैं, ऐसा क्यों?
मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार ऐसा नासूर है, जिसने 8.5 करोड़ जिंदगियों को डस लिया है। ऐसा प्रतीत होता है कि शिवराज सरकार का चाल-चेहरा-चरित्र मात्र भ्रष्टाचार है। यही भाजपा शासित राज्यों में भी हो रहा है। इससे ध्यान बंटाने के लिए जानबूझकर कांग्रेस व विपक्ष की सरकारों को निशाना बनाया जा रहा है, ताकि भाजपाई भ्रष्टाचार पर परदा डाला जा सके।
प्रश्न: अगर एक पार्टी भ्रष्टाचार करे तो दूसरे को क्या इसकी स्वतंत्रता मिल जाती है?
सवाल जांच का है ही नहीं। भाजपाई सरेआम चोरी और सीनाजोरी कर रहे हैं। रोज उजागर हो रहे केंद्रीय कृषि मंत्री के बेटे के तथाकथित आधा दर्जन वीडियो को ही देखें। उसकी विश्वसनीयता जांचने के लिए सुप्रीम कोर्ट के जज से जांच क्यों नहीं होती? इन पर परदा डालने के लिए कभी कांग्रेस को निशाना बनाया जाता है तो कभी जात-धर्म की दीवारें खड़ी कर दी जाती हैं।
जाति गणना पर
प्रश्न: जाति गणना की मांग आप लगातार कर रहे? क्या इसी आधार पर आरक्षण तय होगा?
उत्तर: जाति जनगणना की मांग का आधार सामाजिक न्याय व ओबीसी-दलितों-आदिवासियों-गरीबों की बराबरी व हिस्सेदारी सुनिश्चित करना है। हमारा यह मानना है कि समाज के शोषित और वंचित तबकों की सरकार व शासन में हिस्सेदारी निर्धारित करने के लिए आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा को तोड़कर इसे और बढ़ाना होगा।
प्रश्न: राजनीति में भी इसी फाॅर्मूले को लागू नहीं करना चाहिए?
उत्तर: ओबीसी, दलितों, आदिवासियों की राजनीतिक नुमाइंदगी भी इस न्याय व बराबरी के संकल्प का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
प्रश्न: क्या गरीबों के लिए आरक्षण और बढ़ाना चाहिए?
उत्तर: जी हां, अगर मध्यप्रदेश में ओबीसी की जनसंख्या 50 प्रतिशत है, आदिवासी 21 प्रतिशत हैं, और दलितों की संख्या 16 से 20 प्रतिशत है तो सरकार की कल्याणकारी योजनाओं व बजट में इन वर्गों को सामाजिक न्याय के लिए उनकी हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। यह समावेशी समाज तथा सामाजिक न्याय की परिपाटी है। यही सुनिश्चित करने के लिए जाति जनगणना आवश्यक है।
प्रश्न: ‘इंडिया’ नाम के साथ ही गठबंधन भी देशभक्ति को राजनीति का हिस्सा बना रहा है, मप्र के थीम साॅन्ग समेत नेताओं के प्रचार तक में अब देशभक्ति दिखाई दे रही?
उत्तर: कांग्रेस की रगों में देशभक्ति दौड़ती है। कांग्रेसजनों ने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया। जेल काटीं, यातनाएं सहीं और फांसी के फंदे तक चूमे। आाजदी के बाद भी देश के लिए कुर्बानी देने का हमारा लंबा इतिहास है, जिसे महात्मा गांधी, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, विद्याचरण शुक्ला, नंदकुमार पटेल, सरदार बेअंत सिंह व हजारों कांग्रेस नेताओं ने अपने लहू से लिखा है। छद्म राष्ट्रवादी वो हैं, जिन्होंने कभी देश के लिए अंगुली तक नहीं कटवाई।
प्रश्न: महिला आरक्षण तुरंत लागू करना कांग्रेस की प्रमुख मांग थी, लेकिन विधानसभा चुनाव में टिकट सिर्फ 12 प्रतिशत महिलाओं को ही दिया गया, ऐसा क्यों?
उत्तर: मोदी सरकार ने महिला आरक्षण के नाम पर महिला समाज के साथ घोर छल व प्रपंच किया है। महिला आरक्षण को जनगणना व हल्काबंदी (डीलिमिटेशन) से जोड़कर मोदी सरकार ने यह सुनिश्चित कर दिया कि अगले 10 साल तक यह नहीं हो पाएगा।
राहुल गांधी व कांग्रेस ने मांग रखी कि बगैर किसी देरी के महिला आरक्षण तुरंत लागू हो, तभी यह सार्थक हो पाएगा। जहां तक विधानसभा में नुमाइंदगी का प्रश्न है, हम इसे और बढ़ाएंगे। प्रश्न: मध्य प्रदेश का चुनाव समापन की ओर है तो ऐसे में आप मुड़कर पूरे चुनाव का आकलन कैसे करते हैं?
उत्तर: मध्य प्रदेश का चुनाव जनता बनाम भाजपा का है। एक तरफ जनता व कांग्रेस एकजुट हैं, दूसरी ओर भाजपा। ये चुनाव बदलाव का है। सबकी जुबान पर एक ही लाइन है- ‘बहुत हुआ बस, अब माफ करो’।
प्रश्न: कांग्रेस में नेता और रणनीति दोनों की कमी दिख रही है। आपने, प्रियंका, राहुल ने जितने मप्र के दौरे किए, मोदी ने अकेले उतने दौरे किए, ये बेफिक्री है या रणनीति?
उत्तर: कांग्रेस में नेता, नीयत, रणनीति, दृष्टि और रास्ता बिल्कुल साफ है। अगर कहीं पशोपेश की स्थिति है तो वह भाजपा में है। शायद इसीलिए मोदी को पूरे मध्य प्रदेश की भाजपा में एक भी ऐसा चेहरा दिखाई नहीं देता, जो उनकी पार्टी का नेतृत्व कर सके। यह उनके राजनीतिक दिवालियापन की निशानी है। जहां तक दौरों की बात है, आप अपने तथ्य दुरुस्त करें। राहुल व प्रियंका ने मध्य प्रदेश चुनाव में कड़ी मेहनत की है और कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने 35 से ज्यादा जनसभाओं को संबोधित किया है, जिनमें से 14 केवल आखिरी तीन दिनों में हैं। भाजपा के झूठे प्रचार से आप बिल्कुल प्रभावित न हों, क्योंकि लोग तो मन बना चुके हैं।
खड़गे: मप्र का चुनाव जनता बनाम भाजपा है
प्रश्न: ‘इंडिया’ नाम के साथ ही गठबंधन भी देशभक्ति को राजनीति का हिस्सा बना रहा है, मप्र के थीम साॅन्ग समेत नेताओं के प्रचार तक में अब देशभक्ति दिखाई दे रही?
उत्तर: कांग्रेस की रगों में देशभक्ति दौड़ती है। कांग्रेसजनों ने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया। जेल काटीं, यातनाएं सहीं और फांसी के फंदे तक चूमे। आाजदी के बाद भी देश के लिए कुर्बानी देने का हमारा लंबा इतिहास है, जिसे महात्मा गांधी, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, विद्याचरण शुक्ला, नंदकुमार पटेल, सरदार बेअंत सिंह व हजारों कांग्रेस नेताओं ने अपने लहू से लिखा है। छद्म राष्ट्रवादी वो हैं, जिन्होंने कभी देश के लिए अंगुली तक नहीं कटवाई।