आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : जवाली ऋषि की तपो भूमि जबलपुर में देश का पहला जगद्गुरुकुलम की स्थापना होने जा रही है। जबलपुर शहर से करीब 40 किलोमीटर दूर बेलखाडू में 8 एकड़ की भूमि में जगद्गुरुकुलम का निर्माण होगा, जिसमें की 1008 विद्यार्थी शुरुआती दौर में पढ़ाई कर सकेंगे।

खास बात यह है कि जिस 8 एकड़ जमीन पर देश का पहला जगद्गुरुकुलम बनने जा रहा है उस जमीन को धीरेंद्र गर्ग एवं उनकी पत्नी ममता गर्ग ने दान में दी है। गुरुकुलम में परमहंस मां ललिता देवी के एक भव्य मंदिर का निर्माण भी होगा जो की आध्यात्मिक शक्ति को सुसंपन्न बनाएगा। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज दशहरा में गुरुकुलम की नींव रखेंगे। करीब 30 करोड़ की लागत से बनने वाले जगत गुरुकुलम में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र सभी लोग पढ़ाई कर सकेंगे।

जबलपुर में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने बताया कि जगतगुरु शंकराचार्य ब्रह्मलीन स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज ने अपने जीवन के अंतिम क्षण में हमारे माथे पर अपना हाथ रखा और जगद्गगुरुकुलम की स्थापना करने का दायित्व प्रदान किया था। उनके इस दायित्व में बेलखाडू निवासी धीरेंद्र गर्ग एवं उनकी पत्नी ममता गर्ग ने एक अहम योगदान देते हुए न सिर्फ अपनी 8 एकड़ जमीन दान स्वरूप दे दी बल्कि जगद्गगुरुकुलम के लिए 1 करोड़ 11 लाख 11 हजार 1100 रुपए भी दान स्वरूप दिए हैं। देश के पहले गुरुकुलम को बनाने में करीब डेढ़ साल लगेगा और आने वाली दूसरी चैत्र नवरात्रि तक पूरा हो जाएगा। इस गुरुकुलम में 65 से अधिक गुरु होंगे जो कि छात्रों को शिक्षा देंगे।

देश के पहले जगद्गुरुकुलम में संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी की शिक्षा दी जाएगी, इसके अलावा अगर छात्र चौथा कोई विषय अपनी मर्जी का पढ़ना चाहता है तो उसे भी पढ़ाया जाएगा। जगद्गुरुकुलम में 3 साल से लेकर तब तक बच्चा पढ़ सकता है जब तक की वह अपने पैरों में खड़ा नहीं हो जाता। उन्होंने एक बात और कहीं की गुरुकुलम में सिर्फ हिंदू बच्चे ही पढ़ सकेंगे। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी ने बताया कि छत्तीसगढ़ के एक इंजीनियर कुसुम जायसवाल ने अपने 17 वर्षों के अनुभव के आधार पर जगत जगद्गुरुकुलम व परमहंस मां ललिता देवी का नक्शा बनाया है जिसका मॉडल दिल्ली की कंपनी के द्वारा बनाया गया है। यह पूर्ण रूप से वैदिक वास्तुकला की दृष्टिकोण से निर्मित है।

विश्वविद्यालय के कुलपति को लेकर जगद्गुरु स्वामी शंकराचार्य ने कहा कि देश में जगह-जगह जो विश्वविद्यालय खुले हुए हैं और वहां पर जो कुलपति विराजमान है यह असल में कुलपति नहीं बल्कि अंग्रेजी के चांसलर हैं, जिनका अनुवाद आज कुलपति के रूप में किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कुलपति वह होता है जो कि अपने कुल में रखकर 10000 छात्रों को खिलते हैं, पढ़ते हैं और शिक्षा देते हैं, वह व्यक्ति कुलपति कहलाता है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में ऐसा कोई भी कुलपति नहीं है जो की अपने स्तर से यह काम कर रहे हो, लेकिन अब बहुत जल्द ही देश का पहला जगद्गुरुकुलम ऐसा होगा जहां पर की छात्रों को निशुल्क न सिर्फ शिक्षा दी जाएगी बल्कि उनके रहने, खाने, पीने की व्यवस्था के अलावा उन्हें पूर्ण रूप से पैरों में खड़ा किया जाएगा।

जबलपुर शहर से करीब 40 किलोमीटर दूर बेलखाडू में बन रहा देश के पहले जगद्गुरुकुलम करीब 8 एकड़ में बनेगा, जिसमें की अध्ययन करने के लिए एक विशाल विद्यालय होगा। यहां पर संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी और अन्य भाषाएं की शिक्षा दी जाएगी। इसके अलावा यहां पर ही छात्रों के रहने की व्यवस्था होगी साथ ही खेलने के लिए मैदान, यज्ञशाला सहित तरह- तरह के मनोरंजन साधन छात्रों के लिए उपलब्ध करवाए जाएंगे। जगद्गुरुकुलम में जगद्गुरु शंकराचार्य ब्रह्मलीन स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज की भी एक प्रतिमा को भी स्थापित किया जाएगा।

शंकराचार्य स्वामी मुक्तेश्वर आनंद महाराज ने बताया कि जगद्गुरुकुलम में जो भी बच्चा पड़ेगा उसे अच्छी शिक्षा के साथ- साथ नौकरी भी दिलवाई जाएगी। साथ ही शिक्षा पूरी करने के बाद क्षमता के अनुरूप उसे पूंजी भी दी जाएगी जिससे कि वह अपना कुछ व्यापार, रोजगार शुरू कर सके। जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने देश के सभी लोगों से अपील की है कि जगद्गुरुकुलम को बनाने के लिए कम से कम सवा रुपए का दान अवश्य दीजिए। जबलपुर के धीरेंद्र गर्ग एवं ममता गर्ग ने अपनी पूरी संपत्ति जगद्गुरुकुलम को दान दी है। उन्होंने 8 एकड़ जमीन के अलावा अपना मकान,धन, दौलत सहित एक करोड रुपए से अधिक दान दिए हैं। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद स्वामी ने जगद्गुरुकुलम के लिए क्यूआर कोड का भी विमोचन किया। इसमें सबसे पहले धीरेंद्र गर्ग और उनकी पत्नी ममता गर्ग ने एक करोड़ 11 लाख 11 हजार एक सौ 11 रुपए दान दिए है।