आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मोगरे की खुशबू से महकता परिसर… भजनों की स्वर लहरियों पर नाचते थिरकते भक्त… रामायण व हनुमान की चौपाइयों से गूंजता क्षेत्र और हजारों की तादाद में लंबी कतारों में आलीजा के दर्शनों के अभिलाषी भक्त। यह नजारा था मंगलवार को पंचकुइया स्थित वीर बगीची में आंवला नवमी पर आयोजित अन्नकूट महोत्सव का। जहां 50 हजार से अधिक भक्तों ने आलीजा सरकार के दर्शन कर महाप्रसादी ग्रहण की। शाम 7 बजे प्रारंभ हुआ अन्नकूट महोत्सव अंतिम व्यक्ति आने तक जारी रहा।

श्री बाल ब्रह्मचारी प्रभुवानंद सद्गुरू महाराज के शिष्य बाल ब्रह्मचारी पवनानंद महाराज ने बताया कि वीर बगीची में अन्नकूट महोत्सव इस वर्ष दक्षिण भारतीय स्वरूप में आयोजित किया गया। जिसमें आलीजा सरकार का श्रृंगार बालाजी स्वरूप में किया गया । इस मौके पर वीर आलीजा सरकार को छप्पन भोग केले के पत्तों पर लगाया गया। बालाजी स्वरूप के साथ ही आलीजा सरकार की पोषाक भी मुंबई से आए डायमंड से बनाई गई। जो यहां आने वाले भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी थी। आलीजा सरकार की पोषाक तैयार करने में 10 दिनों का समय लगा।

50 हजार भक्तों ने ग्रहण की महाप्रसादी

अन्नकूट महोत्सव में इंदौर सहित मालवा-निमाड़ के हजारों भक्त यहां महाप्रसादी में शामिल हुए। महाप्रसादी में पुड़ी, नुकती, जलेबी, रामभाजी व सेव का प्रसाद भक्तों को हरे पत्ते पर परोसा गया। भक्तों को प्रसादी परोसने में 400 से अधिक भक्त जुटे हुए थे। वहीं पुरूषों के साथ-साथ महिलाओं ने भी अन्नकूट महोत्सव की व्यवस्था संभाली। वीर बगीची में 50 हजार भक्तों के लिए महाप्रसादी तैयार की गई। अन्नकूट महोत्सव में अंतिम व्यक्ति आने तक महाप्रसादी परोसी गई।

400 भक्तों ने संभाली व्यवस्था

आंवला नवमी पर वीर बगीची में आयोजित अन्नकूट महोत्सव में महाराज सहित 150 सहयोगी द्वारा महाप्रसादी तैयार की गई थी। इसके साथ ही भक्त मंडल के 150 से अधिक भक्तों ने भोजन व्यवस्था, पार्किंग व्यवस्था, जल व्यवस्था, फूल बंगला व्यवस्था, दर्शन-पूजन व्यवस्था संभाली गई।

सुंदरकांड और हनुमान की चौपाईयों से गूंजा परिसर

वीर बगीची में आयोजित अन्नकूट महोत्सव के दौरान जहां भक्तों के दर्शन की अलग-अलग व्यवस्था की गई थी। एक और जहां भक्त वीर आलीजा सरकार के दर्शनों का लाभ ले रहे थे, वहीं दूसरी ओर भक्त मंडल द्वारा संगीतमय सुंदरकांड का पाठ किया जा रहा था। रात 8 बजे से भजन संध्या भी आयोजित की गई, जो मध्यरात्री तक भजनों पर भक्त झूमते नजर आए।

वीर बगीची में अन्नकूट की परंपरा अतिप्राचीन

बाल ब्रह्मचारी प्रभुवानंद सद्गुरू महाराज के शिष्य गादीपति बाल ब्रह्मचारी पवनांद महाराज ने बताया कि पंचकुइया स्थित वीर बगीची में अन्नकूट की परंपरा अति प्राचीन है। वीर बगीची के ब्रह्मचारी कैलाशानंद, ओंकारानंद और प्रभुवानंद महाराज के पूर्व से चली आ रही अन्नकूट महोत्सव की परंपरा आज वर्तमान तक जारी हैं। प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में भक्त यहां पहुंचकर महाप्रसादी का लाभ लेते हैं।