आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : ब्रेन और रीढ़ की हड्‌डी के जोड़ पर ट्यूमर से पिछले करीब एक साल से जूझ रही महिला को इंदौर में नयी जिंदगी मिली है। ट्यूमर के कारण गले और ब्रेन तक खून पहुंचाने वाली नसों में ब्लॉकेज हो गया था। इससे महिला के एक हाथ और एक पैर में लकवा हो गया था। डॉक्टरों की टीम ने 12 घंटे की सर्जरी के बाद ट्यूमर निकालने में सफलता हासिल की।

मामला सिमरोल के पास रहने वाली एक 36 वर्षीय महिला का है। उसे एक साल से एक हाथ और पैर के मूवमेंट में तकलीफ थी। इससे वह बमुश्किल काम कर पाती थी। कुछ समय बाद हाथ और पैर लकवाग्रस्त हो गए। एमआरआई जांच में पता चला कि ब्रेन और रीढ़ की हड्डी के बीच एक बड़ा ट्यूमर है।

ब्रेन और रीढ़ की हड्डी के जंक्शन पर था ट्यूमर

15 दिन पूर्व उक्त महिला ने इंदौर के एक प्राइवेट मेडिकल कॉलेज हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में जांच कराई। उसकी ब्लड, शुगर आदि की जांच सामान्य थी। महिला का फिर से एमआरआई टेस्ट किया गया। इसमें पता चला कि महिला के ब्रेन और रीढ़ की हड्‌डी के जंक्शन पर 4X3X3 सेमी का एक ट्यूमर है। ट्यूमर की साइज बढ़ने की आशंका थी, जिसके चलते उसे निकाला जाना जरूरी था।

सर्जरी में इसलिए लगे 12 घंटे

इसमें सर्जरी के दौरान लकवा ग्रस्त होने के साथ कई गंभीर खतरे रहते हैं। इसके साथ ही गले की मांसपेशियों, ब्रेन को रक्त पहुंचाने वाली नसों के साथ सांस न लेने जैसी कई समस्या भी हो सकती थी।

– जिस स्थान पर ट्यूमर था कि अगर सर्जरी नहीं करते तो जहां से सारी खून की नसें जाती हैं] उसमें नुकसान होने से ब्रेन काम करना बंद कर देता। ऐसे ही सांस लेने वाले स्थानों को भी नुकसान पहुंचता तो वह भी बड़ा जोखिम था।

– डॉक्टरों के मुताबिक जैसे मकड़ी का जाल होता है, वैसे ही उक्त स्थान पर नसों का जाल होता है। ऐसे में नसों व नर्व के गैप में से उन्हें सुरक्षित रखकर ट्यूमर निकालना चुनौतीपूर्ण था। आमतौर पर शरीर में अन्य स्थानों से ट्यूमर एक बार में बाहर निकाला जाता है लेकिन इसमें खून की नसों व नर्व के बीच में जो स्थान थे, उनमें से धीरे-धीरे जाकर ट्यूमर का छोटे-छोटे टुकड़े के रूप मे निकालना पड़ा। इसमें ऐसी कई बारीकियां थी जिसके कारण 12 घंटे का समय लगा।

– डॉक्टरों के मुताबिक अन्य प्राइवेट अस्पतालों में इस सर्जरी में सभी खर्च मिलाकर 5 से 6 लाख रुपए का खर्च आता है। अस्पताल की खुद की एक संजीवनी योजना है। इसमें आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर, वार्ड, वैंटिलेटर आदि का चार्ज नहीं लगता। मरीज को केवल ओटी के सामान व मेडिसिन का खर्च ही वहन करना होता है। महिला का इलाज इसी योजना में हुआ और उसे करीब 60 हजार रुपए का ही खर्च आएगा।