सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भोपाल: भारत की सुपरकंप्यूटिंग यात्रा कई दशकों के तकनीकी विकास और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग में बढ़ती महत्वाकांक्षाओं को दिखाती है। इसकी शुरुआत 1990 के दशक की शुरुआत में Centre for Development of Advanced Computing (C-DAC) द्वारा विकसित PARAM 8000 से हुई। उस दौर में उन्नत कंप्यूटिंग प्रणालियों तक पहुंच सीमित थी, लेकिन PARAM 8000 ने यह साबित किया कि भारत स्वदेशी सुपरकंप्यूटिंग तकनीक को डिजाइन और विकसित करने की क्षमता रखता है।

इसके बाद PARAM श्रृंखला लगातार अधिक शक्तिशाली प्रणालियों के साथ आगे बढ़ी। इन प्रणालियों ने वैज्ञानिक अनुसंधान, मौसम पूर्वानुमान, अंतरिक्ष अनुसंधान, रक्षा, स्वास्थ्य सेवा और अन्य भारी कंप्यूटिंग जरूरतों वाले क्षेत्रों को सहयोग दिया। इसी प्रक्रिया में देश में हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग का घरेलू तंत्र तैयार हुआ और उन्नत कंप्यूटिंग में भारत की क्षमता मजबूत हुई।

नई पीढ़ी में PARAM Rudra शामिल है, जिसे National Supercomputing Mission के तहत विकसित किया गया है। इन प्रणालियों का उद्देश्य देशभर के शोधकर्ताओं और शैक्षणिक संस्थानों को शक्तिशाली कंप्यूटिंग संसाधन उपलब्ध कराना है। PARAM Rudra को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, वैज्ञानिक सिमुलेशन, जलवायु मॉडलिंग, कंप्यूटेशनल बायोलॉजी और इंजीनियरिंग अनुसंधान जैसे उपयोगों के लिए तैयार किया गया है।

PARAM 8000 से PARAM Rudra तक का विकास बताता है कि भारत अपने पहले स्वदेशी सुपरकंप्यूटर के निर्माण से आगे बढ़कर बड़े और अधिक उन्नत कंप्यूटिंग ढांचे के विकास तक पहुंच चुका है। National Supercomputing Mission ने सुपरकंप्यूटिंग सुविधाओं को शोध संस्थानों से जोड़कर इस तंत्र को और विस्तार दिया है।

भारत का सुपरकंप्यूटिंग कार्यक्रम अब तकनीकी आत्मनिर्भरता, वैज्ञानिक नवाचार और उन्नत डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की व्यापक कोशिशों का हिस्सा है।


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