सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौजूद ग्लेशियल झीलों से संभावित ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) के खतरे को देखते हुए निगरानी व्यवस्था मजबूत की जा रही है। चमोली जिले के वसुंधरा ताल से राज्य में ग्लेशियल झीलों के लिए वास्तविक समय निगरानी और पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित करने की शुरुआत हुई है।

राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र के 2023 के आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में कुल 344 ग्लेशियल झीलों की पहचान की गई है। इनमें से 13 झीलों को उच्च जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है। इन 13 झीलों में पिथौरागढ़ की छह, चमोली की चार तथा बागेश्वर, टिहरी और उत्तरकाशी की एक-एक झील शामिल हैं। वसुंधरा ताल भी इन उच्च जोखिम वाली झीलों में शामिल है।

वसुंधरा ताल में लगाए जा रहे तंत्र में जलस्तर सेंसर, स्वचालित मौसम केंद्र, हिम गहराई सेंसर, तापमान सेंसर, झुकाव एवं कंपन सेंसर और जल प्रवाह सेंसर शामिल होंगे। दुर्गम क्षेत्र में आंकड़े भेजने के लिए उपग्रह संचार व्यवस्था का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इससे झील के जलस्तर, मौसम, बर्फ और जल प्रवाह में होने वाले असामान्य बदलावों की निगरानी की जा सकेगी।

GLOF की स्थिति में ग्लेशियल झील से अचानक बड़ी मात्रा में पानी बाहर निकल सकता है, जिससे निचले क्षेत्रों में तेज बाढ़ का खतरा पैदा होता है। नई प्रणाली का उद्देश्य संभावित बदलावों की पहले पहचान कर संबंधित विभागों तक समय रहते सूचना पहुंचाना है। यह अभियान भविष्य में अन्य संवेदनशील ग्लेशियल झीलों में भी ऐसी निगरानी व्यवस्था विकसित करने का आधार बन सकता है।


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