सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ जबलपुर : जबलपुर। राजस्थान के सीकर जिले में तीन नमूनों की पहचान के बाद भारत में सिस्तान सैंड बोआ (Eryx sistanensis) का पहली बार वैज्ञानिक रिकॉर्ड दर्ज किया गया है। यह गैर-विषैला और मोटे शरीर वाला सांप अब तक ईरान और पाकिस्तान से जाना जाता था।
जबलपुर के शोधकर्ता विवेक शर्मा और Tiger Watch के वन्यजीव जीवविज्ञानी धर्मेंद्र खंडाल ने 2025 में रामगढ़-शेखावाटी क्षेत्र में सर्वे के दौरान ये तीन सांप पाए। पहला सांप 19 अगस्त को एक गौशाला में, दूसरा 12 सितंबर को एक घर के आंगन में और तीसरा 21 सितंबर को निर्माणाधीन मकान के पास मिला।
शोधकर्ताओं ने शरीर की बनावट, रंग और शल्कों के पैटर्न की जांच के बाद इनकी पहचान की पुष्टि की। उनके निष्कर्ष 26 मई 2026 को Journal of Threatened Taxa में प्रकाशित हुए, जिससे भारत में इस प्रजाति का पहला वैज्ञानिक रिकॉर्ड सामने आया।
सिस्तान सैंड बोआ भारत के रेड सैंड बोआ से काफी मिलता-जुलता है, इसलिए इसकी पहचान कठिन मानी जाती है। शोधकर्ताओं के अनुसार इसकी पूंछ धीरे-धीरे पतली होकर नुकीले सिरे तक जाती है, जबकि रेड सैंड बोआ की पूंछ आमतौर पर पतली होने से पहले अपेक्षाकृत मोटी रहती है। सिस्तान प्रजाति के शरीर पर गहरे बैंड भी बने रहते हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञों ने कहा कि राजस्थान में ऐसे सांप संभवत: वर्षों से देखे जाते रहे हैं। चूरू, बीकानेर, हनुमानगढ़ और जैसलमेर सहित कई स्थानों से इनके फोटो सामने आने की जानकारी है। हालांकि, उन देखे जाने की घटनाओं की अभी वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है। भारत में इस प्रजाति के फैलाव और संरक्षण जरूरतों को समझने के लिए आगे और सर्वे की आवश्यकता है।
Hashtags: #वजञन #तकनक #जबलपर #ससतनस #रजसथन #सकर #ससतन #EryxSistanensis #रमगढशख #भरतमपहल