सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ दिल्ली : भारत और घाना ने कृषि अनुसंधान, शिक्षा, तकनीक हस्तांतरण और वाणिज्यीकरण में सहयोग मजबूत करने के लिए पांच वर्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता अकरा में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और घाना के क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट (CSIR-CRI) के बीच हुआ।
इस साझेदारी को भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और घाना के विदेश मंत्री सैमुअल ओकुडजेटो अब्लाक्वा की मौजूदगी में औपचारिक रूप दिया गया। यह समझौता विज्ञान, प्रौद्योगिकी और विकास के क्षेत्र में भारत की व्यापक दक्षिण-दक्षिण और भारत-अफ्रीका सहयोग पहल का हिस्सा है।
पहले चरण में सब्जी फसलों के अनुसंधान, खासकर टमाटर पर ध्यान दिया जाएगा। ICAR प्रमाणित कृषि तकनीकों के विस्तार और घाना में घरेलू टमाटर उत्पादन को मजबूत करने के लिए उपयुक्त उच्च उपज वाली टमाटर लाइनों और किस्मों की शुरुआत में सहयोग देगा।
समझौते में कसावा, याम और अन्य कंद फसलों के प्रसंस्करण तथा मूल्य संवर्धन को भी शामिल किया गया है। कटाई के बाद प्रबंधन के तहत कोल्ड स्टोरेज, रेफ्रिजरेटेड परिवहन, छंटाई, ग्रेडिंग और प्रसंस्करण तकनीकों में सहयोग होगा, जिसका उद्देश्य फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना है।
MoU में वैज्ञानिकों और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों, जर्मप्लाज्म और प्रजनन सामग्री, वैज्ञानिक जानकारी, अनुसंधान पद्धतियों और तकनीकी ज्ञान के आदान-प्रदान का प्रावधान है। दोनों देशों के संबंधित अनुसंधान केंद्रों के बीच संयुक्त शोध परियोजनाओं और संस्थागत संपर्कों की भी परिकल्पना की गई है।
घाना स्थित अरिमा फार्म्स लिमिटेड को इस ढांचे के तहत विशिष्ट अनुसंधान और वाणिज्यीकरण गतिविधियों के लिए CSIR-CRI का वाणिज्यिक भागीदार माना गया है। ICAR और CSIR-CRI के प्रतिनिधियों वाला संयुक्त कार्य समूह लागू करने की प्रक्रिया की निगरानी करेगा और नई दिल्ली तथा अकरा में समय-समय पर होने वाली बैठकों के जरिए प्रगति की समीक्षा करेगा।
इस साझेदारी का उद्देश्य कृषि अनुसंधान, तकनीक विकास, क्षमता निर्माण और वाणिज्यिक उपयोग के बीच संबंध को मजबूत करना है, ताकि घाना में टिकाऊ कृषि विकास को समर्थन मिले और किसानों के लिए अवसर बेहतर हों।
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