सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भारत का वाणिज्यिक रियल एस्टेट बाजार वृद्धि के नए चरण में प्रवेश कर रहा है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs), लचीले कार्यस्थल, प्रौद्योगिकी आधारित व्यवसाय और डेटा सेंटर इस मांग के प्रमुख आधार बनकर उभर रहे हैं।
2026 में ऑफिस बाजार में लीजिंग गतिविधि मजबूत रही है। CBRE के अनुसार, भारत के ऑफिस बाजार ने Q2 2026 में अपना अब तक का सबसे मजबूत तिमाही प्रदर्शन दर्ज किया, जिसमें ग्रॉस लीजिंग करीब 24.6 मिलियन वर्ग फुट रही। इस तिमाही में ऑफिस टेक-अप में GCCs की हिस्सेदारी 42% रही, जबकि लचीले कार्यस्थल संचालकों का योगदान 27% रहा।
GCC विस्तार को आगे भी बड़ा संरचनात्मक मांग चालक माना जा रहा है। Colliers का अनुमान है कि अगले दो वर्षों में भारत की Grade A ऑफिस मांग में GCCs की हिस्सेदारी करीब 45 – 50% रह सकती है और सालाना लीजिंग 35 – 40 मिलियन वर्ग फुट तक पहुंच सकती है। मांग अब पारंपरिक टेक्नोलॉजी कंपनियों से आगे बढ़कर बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों में भी फैल रही है।
सस्टेनेबिलिटी और गुणवत्ता भी अब ऑक्यूपायर फैसलों को प्रभावित कर रही हैं। CBRE ने बताया कि Q2 2026 में पूरी हुई नई ऑफिस परियोजनाओं में करीब 76% ग्रीन-सर्टिफाइड थीं।
GCC विस्तार, लचीले ऑफिस, AI इन्फ्रास्ट्रक्चर और प्रीमियम सस्टेनेबल कार्यस्थलों की मांग एक साथ बढ़ने से भारत के वाणिज्यिक रियल एस्टेट बाजार में मांग के कई स्रोत उसके अगले वृद्धि चक्र को आकार दे रहे हैं।
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