Adityamadhav83 / Wikimedia Commons (CC BY-SA 3.0). Cropped.
केंद्र ने क्रिटिकल मिनरल्स के लिए दो कदम उठाए: और ब्लॉक नीलामी में डाले, और उन धातुओं के प्रसंस्करण पर खर्च मंजूर किया जिन्हें भारत अभी भी काफी हद तक आयात करता है।
5 नवंबर को गोवा में कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने क्रिटिकल मिनरल ब्लॉकों की नौवीं किस्त शुरू की। मध्य प्रदेश समेत आठ राज्यों में 20 ब्लॉक पेश हुए। उसी दिन अन्वेषण लाइसेंस की तीसरी किस्त में छह राज्यों के 11 ब्लॉक खोले गए। निविदा बिक्री जनवरी 2027 की शुरुआत तक चलेगी। मंत्रालय ने पार्ट डी खनिजों के दूसरे राउंड में न्यूनतम योग्य बोलीकर्ताओं की संख्या तीन से घटाकर दो की। पिछली आठ किस्तों में पेश 100 ब्लॉकों में से 64 की नीलामी हो चुकी थी।
अलग से कैबिनेट ने लिथियम और निकल के घरेलू प्रसंस्करण संयंत्रों के लिए पांच साल की 2,814 करोड़ रुपये की पूंजी सहायता योजना मंजूर की। योजना में चार संयंत्र हैं, प्रत्येक धातु के दो, 30% पूंजी सब्सिडी के साथ। लिथियम पर अधिकतम 500 करोड़ और निकल पर 900 करोड़ रुपये की सीमा है। न्यूनतम क्षमता लिथियम 30 हजार टन और निकल 50 हजार टन है। तकनीकी रूप से योग्य आवेदकों में सबसे कम सब्सिडी मांगने वाले चुने जाएंगे।
ये खनिज आयात पर निर्भरता घटाने की कोशिश के अलग हिस्से हैं। इस सप्ताह नीलामी में रखे 20 ब्लॉकों की खनिज सूची में लिथियम या निकल नहीं है। इसलिए इन्हें चार प्रस्तावित संयंत्रों के लिए कच्चे माल का स्रोत मानना गलत होगा।
खनन अधिकार मिलना और धातु का प्रसंस्करण अलग काम हैं। भारतीय खनिज उद्योग महासंघ ने द हिंदू से कहा कि संयंत्रों की सफलता के लिए घरेलू खनन और विदेश से कच्चे माल की भरोसेमंद आपूर्ति जरूरी होगी। सब्सिडी निर्माण लागत में मदद करती है; उससे अयस्क की आपूर्ति सुनिश्चित नहीं होती।
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