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मध्यप्रदेश लॉजिस्टिक प्रोत्साहन योजना 2025 वह नियम-पुस्तिका है, जो राज्य की लॉजिस्टिक नीति 2025 के वादों को ऐसी सहायता में बदलती है जिसके लिए निवेशक वास्तव में दावा कर सकता है। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग ने इसे 1 मई 2025 के आदेश से जारी किया, जो 9 मई 2025 के मध्यप्रदेश राजपत्र में प्रकाशित हुआ। योजना 24 फरवरी 2025 से प्रभावी है, जिस दिन नीति जारी हुई थी। नीति पाँच वर्ष के लिए या नई नीति आने तक लागू रहेगी।[1][2]

इस योजना को अक्सर "गोदाम सब्सिडी" कहा जाता है, लेकिन इसका दायरा उससे कहीं सीमित है।

कौन आवेदन कर सकता है

मुख्य निवेश सहायता दो तरह की परियोजनाओं के लिए है, और दोनों के लिए न्यूनतम भूमि, सड़क और निवेश की शर्तें तय हैं। स्थायी पूंजी निवेश (एफसीआई) की गणना में भूमि की लागत शामिल नहीं होती।

– लॉजिस्टिक्स पार्क, इनलैंड कंटेनर डिपो (आईसीडी) और मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (एमएमएलपी): 25 से 75 एकड़ पर कम से कम 12 मीटर चौड़ी पहुँच सड़क और कम से कम ₹50 करोड़ का एफसीआई; 75 एकड़ से अधिक पर 18 मीटर सड़क और ₹100 करोड़।
– प्राइवेट फ्रेट टर्मिनल या गति शक्ति कार्गो टर्मिनल, कंटेनर फ्रेट स्टेशन, एयर फ्रेट स्टेशन या एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स: 5 से 10 एकड़ पर 10 मीटर सड़क और ₹10 करोड़; 10 से 50 एकड़ पर 12 मीटर सड़क और ₹50 करोड़; 50 एकड़ से अधिक पर 18 मीटर सड़क और ₹100 करोड़।

सामान्य, अकेला गोदाम इन श्रेणियों में नहीं आता। मौजूदा गोदामों के लिए योजना में केवल रूपांतरण सहायता का प्रावधान है, जिसका ब्योरा आगे दिया गया है। योजना वेयरहाउसिंग का अर्थ गैर-कृषि उत्पादों के "औद्योगिक वेयरहाउसिंग" से लेती है। प्राथमिक कृषि उपज का भंडारण करने वाली इकाइयाँ पात्र नहीं हैं।

आवेदक ऐसी नई परियोजना होनी चाहिए जो योजना की अवधि में संचालन शुरू करे। उसे मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (एमपीआईडीसी) के पास निवेश का आशय (इंटेंशन टू इन्वेस्ट) दाखिल करना होगा, आईईएम या उद्योग आधार ज्ञापन रखना होगा, बिजली वितरण कंपनी से नया कनेक्शन लेना होगा और जीएसटी में पंजीकृत होना होगा।

योजना क्या देती है

निवेश सहायता: पात्र एफसीआई का 30%, परियोजना के आकार के अनुसार तय अधिकतम सीमा तक। पार्क, आईसीडी और एमएमएलपी के लिए यह सीमा ₹50 करोड़ (25 से 75 एकड़) या ₹75 करोड़ (75 एकड़ से अधिक) है। टर्मिनल, सीएफएस और एयर कार्गो सुविधाओं के लिए ₹5 करोड़ (5 से 10 एकड़), ₹15 करोड़ (10 से 50 एकड़) या ₹25 करोड़ (50 एकड़ से अधिक) है।

यह सीमा निर्णायक है। एक काल्पनिक उदाहरण लें: 8 एकड़ के कंटेनर फ्रेट स्टेशन में ₹20 करोड़ का पात्र एफसीआई हो, तो 30% के हिसाब से ₹6 करोड़ बनते हैं, लेकिन उस आकार-वर्ग की सीमा ₹5 करोड़ ही है।

गणना में केवल वही निवेश जुड़ता है जो प्रस्ताव जमा करने की तारीख से परियोजना पूरी होने तक किया गया हो। राशि तीन किस्तों में मिलती है: निर्माण पूरा होने या संचालन शुरू होने पर, जो पहले हो, 40%; संचालन के एक वर्ष बाद 30%; और दो वर्ष बाद शेष 30%। दूसरी और तीसरी किस्त के लिए शपथ-पत्र और चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा प्रमाणित जीएसटी रिटर्न देना होगा। सुविधा पर माल की पहली खेप पहुँचने की तारीख को संचालन की शुरुआत माना जाता है।

स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क: राज्य शासन के औद्योगिक क्षेत्र में लीज़ पर ली गई भूमि या परियोजना के लिए खरीदी गई निजी भूमि पर 100% प्रतिपूर्ति, अधिकतम ₹5 करोड़।

बाहरी अधोसंरचना: निजी भूमि या अविकसित शासकीय भूमि पर बनी सुविधा के लिए मुख्य सड़क से पहुँच मार्ग, बिजली लाइन, ड्रेनेज-सीवेज कनेक्शन और पानी की पाइपलाइन पर हुए खर्च का 50%। पार्क, आईसीडी और एमएमएलपी के लिए अधिकतम ₹5 करोड़, जिसमें रेल कनेक्टिविटी भी शामिल है; दूसरी श्रेणी के लिए अधिकतम ₹3 करोड़।

ग्रीन प्रमाणन: इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल का गोल्ड या प्लैटिनम प्रमाणन पाने वाले लॉजिस्टिक्स पार्क और एमएमएलपी को प्रमाणन शुल्क का 50%, अधिकतम ₹20 लाख, वापस मिल सकता है।

कृषि गोदाम को औद्योगिक गोदाम में बदलना

कम से कम 10,000 टन क्षमता वाला पंजीकृत कृषि उपज गोदाम यदि औद्योगिक गोदाम में बदला जाए, तो रूपांतरण लागत का 40%, अधिकतम ₹1 करोड़, मिल सकता है। रूपांतरित भवन को नगर तथा ग्राम निवेश के मानकों के अनुरूप होना चाहिए। मान्य कार्यों में डॉक लेवलर और मज़बूत लोडिंग प्लेटफ़ॉर्म, औद्योगिक स्तर का फ़र्श, प्रकाश और वेंटिलेशन, गोदाम के आईटी सिस्टम तथा पैकेजिंग और हैंडलिंग सुविधाएँ शामिल हैं। रूपांतरण के बाद वाणिज्यिक संचालन शुरू होने से 180 दिन के भीतर आवेदन करना होगा। संचालन की शुरुआत वह दिन मानी जाएगी जब पहली खेप पहुँचे या पहला किराया अनुबंध हो।

क्या गणना में नहीं जुड़ता

एफसीआई में भूमि और भूमि विकास, संचालन-पूर्व खर्च, निर्माण अवधि का ब्याज, सलाहकार शुल्क, कार्यशील पूंजी की मार्जिन राशि, कमीशनिंग, कैप्टिव पावर प्लांट, चारदीवारी और गेट, आवास और कैंटीन, बाहरी परिवहन के वाहन और पुरानी मशीनरी शामिल नहीं हैं। पुरानी मशीनरी में छूट केवल उस आयातित उपकरण को है जिसकी शेष आयु कम से कम दस वर्ष हो और जिसके पास अनुपालन प्रमाणन हो।

दस साल तक चलने वाली शर्तें

– मंज़ूरी के तीन वर्ष के भीतर सुविधा का संचालन शुरू होना चाहिए। एमपीआईडीसी के प्रबंध संचालक परियोजना पूरी करने की समय-सीमा दो बार, हर बार अधिकतम एक वर्ष, बढ़ा सकते हैं। समय-सीमा चूकने पर मंज़ूरी रद्द हो जाती है, जिसके विरुद्ध 180 दिन के भीतर राज्य स्तरीय साधिकार समिति (एसएलईसी) में अपील की जा सकती है।
– सुविधा को कम से कम दस वर्ष चालू रखना होगा। यदि यह लगातार छह महीने से अधिक बंद रहे, तो पूरी सहायता 10% वार्षिक दंड ब्याज के साथ वसूली जा सकती है।
– स्थान और सहायता-प्राप्त परिसंपत्तियों में बदलाव नहीं किया जा सकता। सहायता अवधि में और उसके बाद तीन वर्ष तक स्वामित्व बदलने के लिए प्रबंध संचालक की पूर्व लिखित अनुमति चाहिए।
– एक से अधिक राज्य नीतियों में पात्र निवेशक केवल एक नीति के तहत दावा कर सकता है, और राज्य तथा केंद्र की कुल सहायता वास्तविक एफसीआई से अधिक नहीं हो सकती। दिवालिया घोषित संस्थाएँ और शासन द्वारा घोषित डिफ़ॉल्टर पात्र नहीं हैं।
– भुगतान में देरी होने पर कोई ब्याज नहीं मिलेगा। एसएलईसी के निर्णय के विरुद्ध तीन महीने के भीतर निवेश संवर्धन पर मंत्रिपरिषद समिति (सीसीआईपी) में अपील की जा सकती है।

आवेदन कैसे करें

1. राज्य के इन्वेस्ट पोर्टल पर निवेश का आशय दाखिल करें।
2. प्रोजेक्ट रिपोर्ट, लेआउट प्लान, प्राप्त अनुमतियों और भूमि दस्तावेज़ों के साथ स्थापना प्रस्ताव (फ़ॉर्म 1) एमपीआईडीसी को दें।
3. एसएलईसी सैद्धांतिक मंज़ूरी देकर परियोजना की समय-सीमा, निवेश की राशि और दायरा तय करती है।
4. संचालन शुरू होने के 180 दिन के भीतर कार्य-पूर्णता प्रमाण-पत्र तथा चार्टर्ड अकाउंटेंट और चार्टर्ड इंजीनियर के प्रमाण-पत्रों के साथ दावा (फ़ॉर्म 2) प्रस्तुत करें।
5. एसएलईसी जितनी राशि पात्र पाती है, एमपीआईडीसी उसे स्वीकृत कर इलेक्ट्रॉनिक भुगतान से जारी करता है।

एक बिंदु जिस पर स्पष्टता ज़रूरी है

योजना की कंडिका 2.3 कहती है कि ₹125 करोड़ से अधिक निवेश वाली लॉजिस्टिक अधोसंरचना "इस योजना के तहत" लागू होगी, लेकिन इससे छोटी परियोजनाओं की प्रक्रिया के बारे में यह कुछ नहीं बताती। इससे कम निवेश की योजना बना रहे निवेशक एमपीआईडीसी या ज़िला व्यापार एवं उद्योग केंद्र से पहले यह पूछ लें कि उनका दावा किस योजना और किस विभाग के तहत निपटेगा।

विभाग किसी भी समय योजना में संशोधन कर सकता है, उसके प्रावधान शिथिल कर सकता है या उसे रद्द कर सकता है। पूंजी लगाने से पहले invest.mp.gov.in पर देख लें कि योजना का वर्तमान संस्करण वही है। ऊपर दिए आंकड़े मंज़ूरी पर निर्भर अधिकतम सीमाएँ हैं, तय भुगतान की गारंटी नहीं।

स्रोत
[1] मध्यप्रदेश लॉजिस्टिक प्रोत्साहन योजना 2025, 9 मई 2025 की राजपत्र अधिसूचना सहित (औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग / एमपीआईडीसी): https://www.invest.mp.gov.in/wp-content/uploads/2025/07/Notification-with-MP-Logistic-Scheme_2025.pdf
[2] मध्यप्रदेश लॉजिस्टिक नीति 2025: https://www.invest.mp.gov.in/wp-content/uploads/2025/02/Logistic-Policy_digital.pdf


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