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24 फरवरी 2025 के बाद मध्यप्रदेश में लगी विनिर्माण इकाई पर राज्य के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग के दो दस्तावेज़ लागू होते हैं। एमएसएमई विकास नीति 2025 बताती है कि राज्य क्या सहायता देगा। मध्यप्रदेश एमएसएमई प्रोत्साहन योजना 2025, जो 20 जून 2025 को जारी हुई और 27 जून 2025 के राजपत्र में प्रकाशित हुई, बताती है कि कौन पात्र है, आवेदन कैसे और कब करना है। दोनों 24 फरवरी 2025 से प्रभावी हैं, और नीति तब तक लागू रहेगी जब तक उसमें संशोधन न हो या नई नीति न आए।[1][2]

सबसे चर्चित आंकड़ा पात्र निवेश का 40% है। लेकिन इकाई को वास्तव में कितना मिलेगा, यह उसके आकार, क्षेत्र, स्थान और समय पर आवेदन पर निर्भर करता है।

कौन पात्र है

नीति केंद्रीय एमएसएमईडी अधिनियम में परिभाषित विनिर्माण एमएसएमई पर लागू होती है। 1 अप्रैल 2025 से मध्यम उद्यम वह है जिसका संयंत्र एवं मशीनरी में निवेश ₹125 करोड़ तक और वार्षिक टर्नओवर ₹500 करोड़ तक हो।[3] इकाई का वाणिज्यिक उत्पादन, जिसे पहले विक्रय बिल की तारीख से माना जाता है, 24 फरवरी 2025 या उसके बाद शुरू होना चाहिए। इससे पहले शुरू हुई इकाइयाँ पुरानी नीतियों के दायरे में रहेंगी।

विस्तार, डायवर्सिफ़िकेशन या तकनीकी उन्नयन करने वाली मौजूदा एमएसएमई अतिरिक्त निवेश पर दावा कर सकती हैं, बशर्ते निवेश के बाद भी वे एमएसएमई श्रेणी में रहें और नया निवेश नीति में तय न्यूनतम सीमा पूरी करे। संयंत्र एवं मशीनरी में ₹10 करोड़ तक की इकाइयों के लिए यह सीमा मूल निवेश का 30% या ₹1 करोड़, जो कम हो, है; बड़ी इकाइयों के लिए 30% या ₹10 करोड़।

तीन शर्तें, जिन पर अक्सर आवेदन अटकते हैं:
– उद्यम रजिस्ट्रेशन और जीएसटी पंजीयन, दोनों अनिवार्य हैं।
– भोपाल जैसे अधिसूचित नगर निगम क्षेत्र में इकाई तभी पात्र है जब वह राज्य शासन या उसके उपक्रम द्वारा उद्योग के लिए आवंटित शासकीय भूमि, मास्टर प्लान में उद्योग के लिए आरक्षित भूमि या औद्योगिक प्रयोजन के लिए व्यपवर्तित भूमि पर स्थापित हो।
– नीति के परिशिष्ट-1 में अपात्र गतिविधियाँ दी गई हैं, जिनमें व्यापार और अधिकांश सेवाएँ, पान मसाला, तंबाकू, स्टोन क्रशर, तेल रिफ़ाइनिंग, पैकेज्ड पेयजल, एरेटेड पेय, आरा मिल, स्वतंत्र अनाज सफ़ाई इकाइयाँ और विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईज़ेड) की इकाइयाँ शामिल हैं।

मुख्य अनुदान: संयंत्र एवं मशीनरी में ₹10 करोड़ तक

उद्योग विकास अनुदान वाणिज्यिक उत्पादन की तारीख तक किए गए पात्र निवेश का 40% है, जो चार समान वार्षिक किस्तों में मिलता है। पात्र निवेश में संयंत्र एवं मशीनरी, भवन और तय अतिरिक्त मदें, जैसे मशीनों की स्थापना, अतिरिक्त ट्रांसफ़ॉर्मर, बिजली की केबलिंग और मशीनरी लाने का भाड़ा, शामिल हैं। भवन की लागत संयंत्र एवं मशीनरी की लागत के बराबर तक ही गिनी जाती है; फ़ार्मास्युटिकल इकाइयों के लिए उसके दोगुने तक।

एक उदाहरण (केवल समझाने के लिए): ₹4 करोड़ की मशीनरी और ₹5 करोड़ का भवन हो, तो भवन के केवल ₹4 करोड़ गिने जाएँगे और पात्र निवेश ₹8 करोड़ होगा। इसका 40% यानी ₹3.2 करोड़, चार वर्षों में हर साल ₹80 लाख।

महिला, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों के कम से कम 51% स्वामित्व वाली इकाइयों को चार वर्ष तक हर साल 2% अतिरिक्त मिलता है; अजा/अजजा महिला उद्यमियों की इकाइयों को 2.5%। कुल बिक्री का 25% से अधिक निर्यात करने वाली इकाइयों को हर साल 2% अतिरिक्त और 50% से अधिक निर्यात पर 3% अतिरिक्त मिलता है।

₹10 करोड़ से अधिक: तय दर नहीं, सूत्र

बड़ी इकाइयों को "अधिकतम" 40% तक निवेश प्रोत्साहन सहायता मिलती है, जो सात समान वार्षिक किस्तों में दी जाती है। वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने के एक वर्ष बाद तक का निवेश गिना जाता है। मूल राशि नीति के परिशिष्ट-2 के सूत्र से तय होती है, और निवेश बढ़ने के साथ प्रभावी दर 40% से नीचे जा सकती है।

हर साल की किस्त पर फिर गुणक लगते हैं। पूरी राशि के लिए पहले वर्ष कम से कम 40% क्षमता उपयोग और बाद के वर्षों में पिछले सबसे अच्छे वर्ष के उत्पादन का कम से कम 75% या स्थापित क्षमता का 50% ज़रूरी है; इससे कम होने पर राशि अनुपात में घटती है। 100 से 2,500 कर्मचारियों के रोज़गार पर राशि 1.5 गुना तक, उत्पादन के 25% से 75% निर्यात पर 1.3 गुना तक, अधिसूचित प्राथमिकता विकासखंडों में 1.3 गुना और 26% या अधिक विदेशी इक्विटी पर 1.2 गुना तक बढ़ सकती है।

खाद्य प्रसंस्करण: एक विकल्प चुनना होगा

नीति में रायसेन ज़िले, जिसमें मंडीदीप स्थित है, को राज्य के खाद्य प्रसंस्करण केंद्रों में गिना गया है। संयंत्र एवं मशीनरी में ₹10 करोड़ से अधिक निवेश वाली खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को मूल निवेश प्रोत्साहन सहायता का 1.5 गुना मिलता है। ₹5 करोड़ से अधिक निवेश वाली इकाइयाँ इसके अलावा ये दावे भी कर सकती हैं:
– ग्रिड से खरीदी गई बिजली पर वाणिज्यिक उत्पादन से पाँच वर्ष तक ₹1 प्रति यूनिट की प्रतिपूर्ति, जो विद्युत नियामक आयोग के टैरिफ़ आदेश में मिलने वाली छूट के अतिरिक्त होगी।
– मंडी शुल्क की 100% प्रतिपूर्ति, संयंत्र एवं मशीनरी में निवेश के 50% या पाँच वर्ष, जो भी पहले पूरा हो, तक। यह केवल उन्हीं इकाइयों को मिलेगी जो प्रदेश की कृषि उपज खरीदती हैं।

इसके अलावा पाँच वर्ष तक वार्षिक शुद्ध बिक्री टर्नओवर के 1% की उत्पादन से जुड़ी सहायता है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹5 करोड़ है। योजना इसे मुख्य अनुदान के अतिरिक्त नहीं, उसके विकल्प के रूप में रखती है: इकाई दोनों में से एक ही ले सकती है। दावे के साथ एफ़एसएसएआई प्रमाण-पत्र और मंडी शुल्क के लिए वैध मंडी लाइसेंस तथा शुल्क की रसीदें लगानी होंगी।

अन्य सहायता

अलग से गुणवत्ता प्रमाणन (100%, अधिकतम ₹20 लाख), पेटेंट (100%, प्रति पेटेंट अधिकतम ₹10 लाख), विदेशी बाज़ार के लिए निर्यात प्रमाणन (50%, अधिकतम ₹50 लाख), ऊर्जा ऑडिट, प्रदूषण नियंत्रण और निर्यातकों के लिए बंदरगाह तक अंतर्देशीय भाड़े (50%, पाँच वर्ष तक प्रति वर्ष अधिकतम ₹40 लाख) की प्रतिपूर्ति का प्रावधान है। इनमें से अधिकांश सहायता 24 फरवरी 2025 से पहले उत्पादन शुरू करने वाली एमएसएमई को भी मिल सकती है, यदि संबंधित काम नीति की प्रभावी अवधि में किया गया हो।

आवेदन कैसे करें और समय-सीमा

₹10 करोड़ तक की इकाइयाँ ज़िला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक को ऑनलाइन आवेदन करती हैं और कलेक्टर की अध्यक्षता वाली ज़िला स्तरीय सहायता समिति निर्णय लेती है। बड़ी इकाइयाँ आयुक्त, एमएसएमई को आवेदन करती हैं और मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य स्तरीय साधिकार समिति निर्णय लेती है। कौन-सा रास्ता लागू होगा, यह एक ही पैन के अंतर्गत सभी इकाइयों के कुल निवेश से तय होता है।

आवेदन वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने से 180 दिन या छह माह, जो अधिक हो, के भीतर करना होगा। मुख्य अनुदान के देर से आए आवेदन गुण-दोष के आधार पर स्वीकार हो सकते हैं, लेकिन राशि में अनुपात के हिसाब से कटौती हो सकती है, और 18 महीने के बाद प्रकरण निरस्त भी किया जा सकता है। दस्तावेज़ों में उद्यम और जीएसटी प्रमाण-पत्र, जियो-टैग फ़ोटो सहित चार्टर्ड अकाउंटेंट और चार्टर्ड इंजीनियर के प्रमाण-पत्र, बिजली कनेक्शन का अनुबंध या पहला बिल, प्रोजेक्ट रिपोर्ट और शपथ-पत्र शामिल हैं। कमी होने पर सात कार्य दिवस में ऑनलाइन सूचना दी जाती है और आवेदक को सात दिन में जवाब देना होता है; समिति को 30 दिन में निर्णय लेना है। पहली स्वीकृति के बाद अनुदान की हर अगली किस्त के लिए उसकी देय तारीख से 180 दिन के भीतर वार्षिक दावा देना होगा।

शर्तें

कुल सहायता इकाई के स्थायी पूंजी निवेश से अधिक नहीं हो सकती। इकाई केवल एक राज्य नीति के तहत दावा कर सकती है, हालांकि केंद्र सरकार की सहायता इसी कुल सीमा के भीतर जोड़ी जा सकती है। इकाई को सहायता के अनुसार चार या सात वर्ष, या पूरी पात्रता अवधि यदि वह अधिक हो, तक उत्पादनरत रहना होगा। छह महीने से अधिक बंद रहने पर पूरी राशि दंड ब्याज सहित भू-राजस्व के बकाया की तरह वसूली जा सकती है। स्वामित्व बदलने के लिए आयुक्त की पूर्व अनुमति ज़रूरी है। नीति प्रदेश के स्थायी निवासियों को रोज़गार देने की वे शर्तें भी लागू करती है जो एमएसएमई विकास नीति 2021 में तय थीं, इसलिए आवेदक इन्हें ज़िला व्यापार एवं उद्योग केंद्र से स्पष्ट कर लें।

राज्य शासन किसी भी समय नीति में संशोधन कर सकता है या उसके प्रावधान शिथिल कर सकता है। यहाँ दिए आंकड़े पात्रता की स्वीकृति पर निर्भर अधिकतम सीमाएँ हैं, तय भुगतान की गारंटी नहीं।

स्रोत
[1] मध्यप्रदेश एमएसएमई विकास नीति 2025, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग: https://mpmsme.gov.in/mpmsmecms/Uploaded%20Document/Documents/MP%20MSMED%20Policy%202025.pdf (हिंदी: https://mpmsme.gov.in/mpmsmecms/Uploaded%20Document/Documents/MP%20MSMED%20Policy%202025%20Hindi.pdf)
[2] मध्यप्रदेश एमएसएमई प्रोत्साहन योजना 2025 (राजपत्र, 27 जून 2025): https://mpmsme.gov.in/mpmsmecms/Uploaded%20Document/Documents/Gazette%20MP%20MSME%20Promotion%20Scheme%202025.pdf ; योजना का पाठ: https://mpmsme.gov.in/mpmsmecms/Uploaded%20Document/Documents/MP%20MSME%20Incentive%20Scheme%202025.pdf
[3] भारत सरकार, एमएसएमई मंत्रालय की अधिसूचना का.आ. 1364(अ), 21 मार्च 2025: https://udyamregistration.gov.in/docs/261838_220191.pdf


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