चित्र श्रेय
बेंगलुरु: कर्नाटक के पेट्रोल में कितना एथेनॉल है, इस पर राज्य सरकार और तेल कंपनियों की जांच के नतीजे अलग हैं। राज्य का कहना है कि कुछ नमूनों में इसकी मात्रा 30% से ऊपर मिली। इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल का दावा है कि उनकी जांच में पेट्रोल तय सीमा के भीतर था। कंपनियों ने राज्य के साथ संयुक्त जांच मांगी है।
कर्नाटक के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के मंत्री रिजवान अरशद ने शुक्रवार को कहा कि एनएबीएल से मान्यता प्राप्त और आईएसओ प्रमाणित प्रयोगशालाओं की जांच में इंडियन ऑयल के एक नमूने में 31.2% और एचपीसीएल के एक नमूने में 30.5% एथेनॉल मिला। उन्होंने पंपों पर एथेनॉल की मात्रा बताने, तय सीमा से अधिक एथेनॉल मिलाने पर कार्रवाई और प्रभावित उपभोक्ताओं को मुआवजा देने की मांग की।
तेल कंपनियों ने जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि 27 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से जांचे गए सभी 893 नमूनों में एथेनॉल 19% से 21% के बीच था। इनमें कर्नाटक के 56 नमूने शामिल थे। कंपनियों के मुताबिक ई20 पेट्रोल के लिए यही निर्धारित सीमा है।
दोनों पक्षों ने अलग-अलग नमूने जांचे हैं। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि एक ही पेट्रोल की दो जांचों में अलग नतीजे आए, या पूरे कर्नाटक में 30% एथेनॉल वाला पेट्रोल बिक रहा है।
अब वाहन चालकों के लिए सवाल है कि इन दावों की जांच कैसे होगी। कंपनियों के बयानों में संयुक्त जांच की तारीख नहीं दी गई है। नमूने कहां और कब लिए गए, किस तरीके से जांच हुई, यह जानकारी सामने आने पर तुलना आसान होगी। फिलहाल अधिक एथेनॉल मिलाने का आरोप विवादित है। केवल इन आंकड़ों से किसी वाहन के खराब होने की वजह भी तय नहीं होती।
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