Christopher J. Fynn / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0). Cropped.
केंद्र सरकार ने इस साल खुले बाजार में बेचे जाने वाले चावल का लक्ष्य दोगुना कर दिया है। साथ ही देश भर के व्यापारियों, खुदरा विक्रेताओं और मिल मालिकों को हर हफ्ते चावल और धान का स्टॉक बताने का आदेश दिया है। यह चावल के दाम को लेकर सरकार की बढ़ती चिंता का संकेत है।
6 नवंबर के आदेश के तहत थोक व्यापारी, खुदरा विक्रेता, बड़ी रिटेल चेन और प्रोसेसर हर शुक्रवार फूड स्टॉक पोर्टल पर अपना स्टॉक दर्ज करेंगे। इसमें बासमती, उसना चावल, टूटा चावल और धान समेत छह श्रेणियां हैं। खाद्य मंत्रालय ने कहा है कि पोर्टल पर पंजीकरण न कराने या स्टॉक सीमा तोड़ने वालों पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी।
खुला बाजार बिक्री योजना में ई-नीलामी से 2026–27 में चावल बिक्री का लक्ष्य 25 लाख टन से बढ़ाकर 50 लाख टन किया गया है। पुराना लक्ष्य पूरा हो चुका है: 31 अक्टूबर तक 25 लाख टन चावल निजी खरीदारों को बिका, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 11 लाख टन था। नया आंकड़ा एक ऊपरी सीमा है। बाजार में असल में कितना अतिरिक्त चावल पहुंचेगा, यह आगे की नीलामियों और बोलियों पर निर्भर करेगा।
केंद्र ने आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना को जरूरत पड़ने पर 31 जनवरी 2027 तक चावल और धान पर स्टॉक सीमा लगाने की सहमति भी दी है। नेफेड, एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार को सस्ते भारत चावल का अतिरिक्त आवंटन दिया जा रहा है, खासकर दक्षिणी राज्यों के लिए।
दबाव सबसे ज्यादा दक्षिण में दिख रहा है। द हिंदू ने रविवार को बताया कि तमिलनाडु के 15 बड़े जलाशयों में कुल क्षमता का करीब एक तिहाई पानी है, जबकि पिछले साल इसी समय यह लगभग 92% था। पूर्वोत्तर मानसून न सुधरा तो वहां चावल उत्पादन घटने का खतरा है।
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