सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: भारतीय वन प्रबंध संस्थान, भोपाल “वानिकी के माध्यम से नदी पुनर्जीवन का विज्ञान और कला” विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। इस कार्यशाला में देश भर के विभिन्न राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले 30 पेशेवरों ने शिरकत की जिसमें वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी, परियोजना वैज्ञानिक, प्रोफेसर, पीएचडी छात्र, एन.जी.ओ के पेशेवरों तथा अन्य हितधारक शामिल रहे।

उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि आईआईएफएम के निदेशक, के. रविचंद्रन आईएफएस, निदेशक, भारतीय वन प्रबंध संस्थान रहे। साथ ही सी.पी. काला, अध्यक्ष (एमडीपी), आईआईएफएम; मनमोहन यादव, डीन, आईआईएफएम तथा एमडी ओमप्रकाश, पाठ्यक्रम निदेशक, आईआईएफएम भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। अपने उद्घाटन भाषण के दौरान, के रविचंद्रन ने देश की मौसमी नदियों को बारहमासी नदियों में परिवर्तित करने में कायाकल्प की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने बताया की मौसमी नदियों को बारहमासी नदियों में बदलने से प्रवाह और पानी की गुणवत्ता में वृद्धि होती है, जिससे भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलता है।

साथ ही उन्होंने औद्योगीकरण के कारण नदीयो में हो रहे प्रदूषण पर चर्चा करते हुए, भारत सरकार के गंगा मिशन में के उदहारण से सरकार की व्यापक योजनाओं पर भी प्रकाश डाला, साथ ही प्रकृति-आधारित समाधान को रेखांकित करते हुए वानिकी की महत्वपूर्ण भूमिका पर व्याख्यान दिया।

उन्होंने कहा, निलंबित ठोस और रासायनिक ऑक्सीजन मांग जैसे प्रमुख मापदंडों को ध्यान में रखते हुए नदी के किनारे वानिकी हस्तक्षेप प्रदूषकों को प्रभावी ढंग से अवशोषित करता हैं। साथ ही उन्होंने औद्योगिक निर्वहन को उसके स्त्रोत पर ही उपचारित करने पर जोर दिया जिससे नदियों में कम-से-कम प्रदूषक पहुंचे एवं नदी प्रणालियों को स्थिर और शुद्ध करने के लिए वानिकी कार्यों को नियोजित किया जाने पर भी चर्चा की। रविचंद्रन ने वानिकी से कायाकल्प करने वाले गंगा मिशन का उदाहरण देते हुए इस बात पर जोर दिया कि वानिकी एक सरल पारिस्थितिकी तंत्र और प्रकृति-आधारित विकल्प है।

इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिष्ठित विशेषज्ञों के सत्र शामिल हैं, जिसमें नदी पुनर्जीवन के सिद्धांत, भारत में नदी प्रदूषण और पुनर्स्थापन, वन जल विज्ञान और पुनर्जीवन में इसका महत्व तथा वन संरक्षण जैसे आवश्यक विषयों को शामिल किया गया है। इस कार्यशाला के दौरान, प्रतिभागियों को मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम में नदी पुनर्स्थापन परियोजना, नर्मदा लैंडस्केप के भ्रमण पर भी ले जाय जायेगा जिससे वे इस विषय का गहराई से अध्ययन कर सके।