सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: भारतीय वन प्रबंध संस्थान, भोपाल में “पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित समाधान एवं ग्रीन क्रेडिट” विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। इस कार्यशाला में 30 पेशेवरों के एक विविध समूह ने भाग लिया जिसमें अंतरराष्ट्रीय तथा राष्ट्रीय प्रतिभागियों के साथ-साथ देश भर के 13 राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख हितधारक शामिल है।
इस तीन दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन समारोह में मुख्य रूप से शुभरंजन सेन, आईएफएस, एपीसीसीएफ (वन्यजीव), मध्य प्रदेश; के. रविचंद्रन, आईएफएस, निदेशक, आईआईएफएम; सी पी काला, अध्यक्ष (एमडीपी), आईआईएफएम; अद्वैत एडगांवकर एवं निमई दास, पाठ्यक्रम निदेशक, आईआईएफएम उपस्तिथि रहे।
अपने उद्बोधन में, सेन ने पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित समाधानों के महत्व तथा उनके कार्यान्वयन पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान परिपेक्ष में इन समाधानों के कार्यान्वयन का उद्देश्य पर्यावरण के संरक्षण से कहीं आगे जा चुका है, जो कि केवल पर्यावरण को बचाने तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि मानव जीवन को बचाने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण बन चुका है।
इस कार्यशाला की आवश्यकता पर जोर देते हुए, के. रविचंद्रन ने जलवायु परिवर्तन के युग में रहने की गंभीर चुनौतियों पर प्रकाश डाला, पर्यावरण के क्षरण और मनुष्यों और अन्य जीवन रूपों पर इसके प्रतिकूल प्रभावों पर जोर दिया।
पारंपरिक समाधानों की सीमाओं को रेखांकित करते हुए, उन्होंने भूमि और जैव विविधता क्षरण के साथ-साथ पर्यावरण प्रदूषण के मुद्दों के समाधान में प्रकृति-आधारित और पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित समाधानों की प्रभावशीलता पर चर्चा की। साथ ही, उन्होंने आईसीएफआरई के साथ भारत में ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम के महत्वपूर्ण विकास में नियम और दिशानिर्देश तैयार करने में आईआईएफएम, भोपाल द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका पर भी चर्चा करते हुए प्रकाश डाला।
इस तीन दिवसीय कार्यशाला का उद्देश्य पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के विभिन्न पहलुओं को समझना तथा व्यावहारिक, किफायती एवं प्रभावी समाधान प्रदान करना है। 23 नवंबर तक चलने वाली इस तीन दिवसीय कार्यशाला के दौरान, आईआईएफएम के प्रतिष्ठित संकाय पर्यावरणीय मुद्दों और उनके समाधानों को संबोधित करते हुए विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण देंगे।