सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: भारतीय वन प्रबंध संस्थान, भोपाल ने द्वारा विभिन्न राज्यों के आईएफएस अधिकारियों के लिए “वन प्रमाणन और वाणिज्यिक कृषि-वानिकी” पर अपना सप्ताह भर का प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का आयोजान किया गया। प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के पहले दिन के वक्ता – ए के जौहरी, पूर्व पीसीसीएफ, असम, के. रविचंद्रन, निदेशक, आईआईएफएम भोपाल और मनमोहन यादव, प्रोफेसर एवं पाठ्यक्रम निदेशक, आईआईएफएम रहे।
राष्ट्रीय कार्य योजना संहिता संशोधन समिति के सदस्य रहे, ए के जौहरी, ने राष्ट्रीय कार्य योजना संहिता 2023 की मुख्य विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने भाग लेने वाले अधिकारियों को सूचित किया कि एनडब्ल्यूपीसी 2023 ने पूर्व में सतत वन प्रबंधन (एसएफएम) के सिद्धांतों को अपनाया है। जिन्हें IIFM द्वारा भोपाल-भारत प्रक्रिया के तहत विकसित किया गया था। उन्होंने आगे इस बात पर जोर दिया कि अब से देश में वन प्रभागों के लिए सभी कार्य योजनाएं भारत सरकार की मंजूरी से पहले अनिवार्य रूप से इस नए कोड का उपयोग करके तैयार की जाएंगी।
डॉ. के रविचंद्रन ने अपने उदबोधन में बताया कि आईआईएफएम द्वारा विकसित भारतीय वन प्रबंधन मानक को नई कार्य योजना संहिता में शामिल किया गया है। इन मानकों का उपयोग करके कार्य योजना की शुरुआत के 5 वर्षों के बाद मध्यावधि में समीक्षा की जाएगी। रविचंद्रन ने आगे बताया कि आगे बढ़ते हुए भारत अपनी स्वयं की प्रमाणन योजना, अर्थात् भारतीय वन एवं लकड़ी प्रमाणन योजना (आईएफडब्ल्यूसीएस) लेकर आया है। यह योजना न केवल सभी सरकारी स्वामित्व वाली वन भूमि पर बल्कि किसानों की भूमि पर उगाए गए वाणिज्यिक वृक्षारोपण के लिए भी लागू होगी। यह योजना किसी भी अंतरराष्ट्रीय वन प्रमाणन योजना से मेल खाती है और इससे प्रमाणित उत्पादों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच प्राप्त करने में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि IFWCS के कार्यान्वयन के लिए IIFM को योजना संचालन एजेंसी के रूप में नामित किया गया है।
मनमोहन यादव ने सतत वन प्रबंधन और वन प्रमाणीकरण की अवधारणा के विकास पर विस्तार से चर्चा की। यादव ने वैश्विक वन प्रमाणन योजनाओं – वन प्रबंधन परिषद (एफएससी) और वन प्रमाणन योजनाओं के समर्थन कार्यक्रम (पीईएफसी) तथा भारतीय वन एवं लकड़ी प्रमाणन योजना की प्रमुख विशेषताओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी बताया कि यूरोपीय संघ तथा अन्य क्षेत्र अपने देशों में लकड़ी/लकड़ी उत्पादों के आयात के लिए कड़े नियम ला रहे हैं। भारतीय वन प्रबंधन योजना को अपनाने और आई ऍफ़ डब्ल्यू सी एस से इन विदेशी बाजारों में भारतीय निर्यात को सहायता मिलेगी।
यादव ने यह भी बताया कि विश्व स्तर पर 450 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र ही प्रमाणित है जो विश्व के कुल वन का लगभग 11% है। हालाँकि, भारत में 1% से भी कम वन क्षेत्र प्रमाणित है, डॉ. यादव ने आगे बताया।