सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा, मुख्य न्यायाधिपति, म.प्र. उच्च न्यायालय, जबलपुर एवं मुख्य संरक्षक, म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन और प्रेरणा से जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के सचिवों के लिये दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम म.प्र. राज्य न्यायिक अकादमी, जबलपुर में सम्पन्न हुआ।
न्यायमूर्ति विवेक रूसिया, प्रशासनिक न्यायाधिपति, म.प्र. उच्च न्यायालय, जबलपुर ने समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का पद अत्यंत महत्वपूर्ण एवं जवाबदेही का है। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि जिला प्राधिकरण द्वारा नियुक्त लीगल ऐड डिफेंस काउंसेल्स जेल में निरूद्ध बंदियों से अनिवार्य रूप से मुलाकात कर प्रकरणों में प्रभावी पैरवी करें तथा नियमित तौर पर बंदियों को उनके प्रकरणों की अद्यतन स्थिति की जानकारी साझा करें तथा उनके जेल विजिट का जेल प्राधिकारियों के माध्यम से सत्यापन किया जाए। मध्यस्थता के माध्यम से प्रकरणों के निराकरण हेतु प्रशिक्षित मध्यस्थ एवं सामुदायिक मध्यस्थता स्वयंसेवकों की सेवायें ली जायें।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन न्यायिक अकादमी के संचालक उमेश कुमार पांडव तथा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य सचिव सुमन श्रीवास्तव एवं उपस्थित रिसोर्स पर्सन्स के द्वारा किया गया।
उद्घाटन सत्र में प्रशिक्षण के उद्देश्यों, कार्यक्रम की रूपरेखा तथा अपेक्षित परिणामों पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला गया।
प्रशिक्षण के दौरान धरमिन्दर सिंह, रजिस्ट्रार जनरल, म.प्र. उच्च न्यायालय, जबलपुर ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के सचिवों की भूमिका, प्रशासनिक एवं पर्यवेक्षणीय दायित्व, प्रभावी कार्यालय प्रबंधन, विभागीय समन्वय एवं संचार कौशल के उन्नयन पर विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया।
गिरिबाला सिंह अध्यक्ष जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, भोपाल ने सचिवों को जिला प्रशासन, पुलिस, समाज कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य विभाग आदि के साथ समन्वय स्थापित कर विधिक जागरूकता कार्यक्रमों के बेहतर संचालन तथा विधिक सेवा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने लोक अदालत, मध्यस्थता एवं सामुदायिक मध्यस्थता की अवधारणा एवं उपयोगिता पर भी विस्तृत जानकारी दी।
सुमन श्रीवास्तव सदस्य सचिव म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण एवं सचिन शर्मा अतिरिक्त निदेशक म.प्र. राज्य न्यायिक अकादमी ने नालसा पीड़ित प्रतिकर योजना पॉक्सो मामलों में प्रतिकर एवं पुनर्वास प्रक्रिया, म.प्र. अपराध पीड़ित प्रतिकर योजना, पुलिस एवं अभियोजन से समन्वय, मनोवैज्ञानिक परामर्श तथा प्रतिकर आवेदनों के समयबद्ध निराकरण पर व्यापक जानकारी दी।
हर्ष सिंह बहरावत, रजिस्ट्रार (प्रशासन), म.प्र. उच्च न्यायालय ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों की निगरानी, मूल्यांकन, वित्तीय प्रबंधन, रिपोर्टिंग तंत्र, बजट उपयोगिता, लेखा परीक्षा तथा सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग संबंधी दिशा-निर्देशों पर मार्गदर्शन प्रदान किया।
अर्चना सिंह रजिस्ट्रार / सचिव उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति, जबलपुर ने जेलों में निरुद्ध बंदियों हेतु विधिक सहायता, न्यायालयों द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों, जेल प्राधिकारियों एवं लीगल एड डिफेंस काउंसिल से समन्वय, अंडर ट्रायल रिव्यू कमेटी की कार्यप्रणाली तथा विचाराधीन बंदियों की संख्या में कमी लाने संबंधी प्रयासों पर प्रकाश डाला।
कुलदीप सिंह कुशवाह प्रिंसिपल रजिस्ट्रार (आईटी-चीफ सिस्टम एनालिस्ट) एवं श्री सूर्य प्रकाश शर्मा, रजिस्ट्रार (आईटी), म.प्र. उच्च न्यायालय ने मोटर दुर्घटना दावा क्षतिपूर्ति प्रकरणों के भुगतान हेतु उच्च न्यायालय द्वारा विकसित डैशबोर्ड प्रणाली में जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों की भूमिका एवं प्रक्रियाओं की जानकारी दी।
आशीष शुक्ला, वरिष्ठ तकनीकी निदेशक, एन.आई.सी. जबलपुर द्वारा ई-ऑफिस का उपयोग और  कर्मयोगी के माध्यम से विभागीय प्रबंधन एवं कार्य दक्षता बढ़ाने से संबंधित विभिन्न पाठ्यक्रमों के अध्ययन के संबंध में जानकारी दी गई।प्रशिक्षणार्थियों द्वारा विधिक साक्षरता कार्यक्रमों के प्रभावी आयोजन, शिविर संचालन, शिविर पूर्व एवं पश्चात गतिविधियों पर समूह प्रस्तुति दी गई, जिसमें विधिक सेवा योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई।
कार्यक्रम के उद्घाटन एवं तकनीकी सत्रों का संचालन अनिरुद्ध जैन, उप सचिव, म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा किया गया तथा आभार प्रदर्शन सुमन श्रीवास्तव सदस्य सचिव म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा किया गया। उपरोक्त प्रशिक्षण कार्यकम में कुल 47 सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सम्मिलित रहे।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में म.प्र. राज्य न्यायिक अकादमी एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारियों एवं कार्मिकों की सहभागिता रही

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