आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भीम सिंह मीणा

ऐसी शर्तें लगाईं कि दूसरी कंपनियां अपात्र हो गईं

दो ऐसी शर्तें.

..टर्फ पैड की मोटाई 15 एमएम हो, टेंडर में सिर्फ वही कंपनी भाग ले सकेगी

जिसने मप्र में टर्फ लगाई हों

नतीजा…235 कंपनियों में से सिर्फ 4 ही ले पाईं भाग, उस कंपनी को काम मिला, जिसने 5 टर्फ लगाई थी

मध्यप्रदेश के तीन हॉकी मैदानों में एस्ट्राे टर्फ लगाई जा रही है। विभाग इसे उपलब्धि बता रहा है, लेकिन इन टर्फ पर खर्च होने वाली राशि को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

दरअसल, मप्र में जिस काम के लिए 3.50 करोड़ से 5 करोड़ रुपए तक खर्च किए जा रहे हैं, वही काम दिल्ली और कोलकाता में आधी कीमत पर हो चुका है। यही नहीं, मप्र में बन रहे दो टर्फ के कामों में काफी अंतर भी है, फिर भी दोनों के टेंडर लगभग एक ही कीमत पर हुए हैं।

खर्च के इस गड़बड़झाले को समझने के लिए भास्कर ने पड़ताल की तो पता चला कि मप्र ने जो काम करीब 4 करोड़ रुपए में कराया, वही काम उसी वर्ष में दिल्ली और कोलकाता में 2.41 करोड़ रुपए तक में हो गया। हालांकि, मप्र युवा खेल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि काम गाइडलाइन के हिसाब से ही हुआ है। शेष | पेज 10 पर

एमसीडी ने जिस नियम से करोड़ों रुपए बचाए, उसे मप्र के अफसर नहीं मानते

दिल्ली के शिवाजी स्टेडियम में एस्ट्रो टर्फ लगाने के लिए म्युनिसिपल काॅर्पोरेशन दिल्ली (एमसीडी) ने टेंडर जारी किया था। जब कंपनियों ने रेट कोट किए तो एमसीडी ने निर्माता कंपनी से ही टर्फ की असली कीमत पूछ ली। इस कंपनी का नाम शिवनरेश स्पोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने अपने टेंडर में लिखा था। यह लेटर दैनिक भास्कर के पास है। एमसीडी ने अप्रैल 2021 में लेटर लिखा तो कंपनी ने दिल्ली वाले टर्फ की कीमत 75,357 यूएस डाॅलर बताई थी। तब के हिसाब से 56.51 लाख रुपए। इस लेटर के आने के बाद ही टेंडर की कीमत घटकर 2.18 करोड़ रुपए हो गई थी। निर्माता कंपनी से कीमत पूछने का नियम जीएफआर में वर्णित है। लेकिन, मप्र के अधिकारियों ने टर्फ की कीमत पता करने की कोशिश भी नहीं की।

खेल विभाग में एक ही अधिकारी को खरीदारी की जिम्मेदारी

खेल एवं युवा कल्याण मप्र शासन में पिछले आठ साल से एक ही अधिकारी बालूसिंह यादव के पास इन्फ्रास्ट्रक्चर और इक्यूपमेंट खरीदारी की जिम्मेदारी है। निविदा तैयार करने का काम भी उन्हीं के पास है, जबकि सीवीसी की स्पष्ट गाइडलाइन है कि कोई भी अधिकारी को यह जिम्मेदारी तीन वर्ष से अधिक नहीं दी जानी चाहिए।

सिर्फ चार कंपनियों ने टेंडर डाले तो हम क्या करें

टेंडर में सिर्फ 4 कंपनियों के शामिल होने के सवाल पर अफसर तर्क दे रहे हैं कि हमने तो टेंडर निकाला था, यदि कोई हिस्सा नहीं ले रहा है तो हम क्या करें? पड़ताल में यह भी पता चला कि हाल ही में जिन कंपनियों को काम मिला, उन चारों कंपनियों ने एक ही दिन में एक घंटे के अंतर से अपनी बिड डाली और टेंडर क्लोज हो गए।

मप्र में हो जाएंगे टर्फ वाले 18 मैदान, देश का इकलौता राज्य

राजधानी में एक साथ चार हॉकी मैदान में टर्फ लगाने का काम चल रहा है। यह टर्फ लगने के बाद मप्र इकलौता राज्य बन जाएगा, जहां 18 टर्फ वाले हॉकी मैदान होंगे। इनमें से अकेले भोपाल में ही 7 एस्ट्रो टर्फ मैदान हो जाएंगे। पूरे भारत में इतने अधिक टर्फ वाला भोपाल इकलौता शहर हो जाएगा। मप्र खेल विभाग के अफसर इसे अपनी उपलब्धि बता रहे हैं और कह रहे हैं कि हॉकी को बढ़ावा देने के लिए ऐसा किया जा रहा है। अब यदि बढ़ावे की बात करें तो भोपाल से आखिरी इंटरनेशल प्लेयर वर्ष 2000 में समीर दाद निकले थे। इसके बाद इटारसी से विवेक सागर ने अपना मुकाम बनाया, जबकि एक समय भोपाल के खिलाड़ियों का नेशनल और इंटरनेशनल टीम में दबदबा हुआ करता था।

मप्र में बार-बार इन कंपनियों ने लगाई टर्फ

हॉकी मैदान कंपनी का नाम

मयूर पार्क, भोपाल एडवांस स्पोर्ट्स, दिल्ली

ऐशबाग, भोपाल एडवांस स्पोर्ट्स, दिल्ली

ग्वालियर, महिला एडवांस स्पोर्ट्स, दिल्ली

बैतूल एडवांस स्पोर्ट्स, दिल्ली

इंदौर एडवांस स्पोर्ट्स, दिल्ली

सिवनी एडवांस स्पोर्ट्स, दिल्ली

मंदसौर सिमकोट इंटरनेशनल, दिल्ली

शिवपुरी सिमकोट इंटरनेशनल, दिल्ली

इटारसी सिमकोट इंटरनेशनल, दिल्ली

दमोह ग्रेट स्पोर्टस टेक लिमिटेड, हैदराबाद

होशंगाबाद ग्रेट स्पोर्टस टेक लिमिटेड, हैदराबाद

जबलपुर शिवनरेश स्पोर्ट्स, दिल्ली

ग्वालियर एडल ग्रास

दो टर्फ से समझें, मप्र में कैसे लुटाए गए पैसे

एक – ग्वालियर की वुमन हॉकी एकेडमी का टर्फ बदलने के लिए मार्च 2018 में टेंडर निकला। यह पलक मार्केटिंग एंड इडल ग्रास बीवी को 3.56 करोड़ रुपए में मिला। उसे वाॅटर बेस्ड ग्लोबल सिंथेटिक हॉकी टर्फ लगाना थी, ड्रेनेज तैयार करना था।