सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ Sagar: अल नीनो से दिल्ली में गर्म रह सकती है सर्दी, प्रदूषण का खतरा बरकरार
नई दिल्ली। दिल्ली में इस बार सर्दियों का मौसम सामान्य से अधिक गर्म रह सकता है, लेकिन इससे वायु प्रदूषण से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। मौसम संबंधी परिस्थितियों और अल नीनो के संभावित प्रभाव को लेकर सामने आए शोध तथा विशेषज्ञों के आकलन ने राजधानी में सर्दियों के दौरान प्रदूषण की चुनौती को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि सर्दियों में बारिश की गतिविधियां कमजोर रहती हैं और हवा की गति कम होती है, तो प्रदूषक तत्व वातावरण में लंबे समय तक जमा रह सकते हैं।
अल नीनो प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में समुद्र की सतह के तापमान और वायुमंडलीय परिस्थितियों में होने वाला बदलाव है, जिसका असर दुनिया के कई क्षेत्रों के मौसम पर पड़ता है। भारत के मौसम विभाग के अनुसार, वर्ष 2026 के अक्टूबर-दिसंबर के दौरान अल नीनो के और मजबूत होने की संभावना है। हालांकि, इसका क्षेत्रीय मौसम पर वास्तविक प्रभाव अन्य समुद्री और वायुमंडलीय परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगा।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अल नीनो के प्रभाव से पश्चिमी विक्षोभ कमजोर पड़ सकते हैं। ये विक्षोभ उत्तर भारत में सर्दियों के दौरान बारिश लाते हैं। बारिश और तेज हवाएं वातावरण में मौजूद प्रदूषक कणों को हटाने तथा उनके फैलाव में मदद करती हैं। इनके कमजोर रहने पर दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर बढ़ सकता है।
एक शोध में पाया गया है कि उत्तर भारत में सर्दियों के दौरान पीएम 2.5 प्रदूषण के साल-दर-साल बदलाव का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा पश्चिमी विक्षोभ की गतिविधियों से जुड़ा है। अध्ययन के अनुसार, कम बारिश वाले सर्दियों के मौसम में प्रदूषण अधिक गंभीर हो सकता है।
इसलिए सामान्य से गर्म सर्दी का अर्थ साफ हवा नहीं है। तापमान के साथ हवा की गति, बारिश, पराली जलाने की घटनाएं और स्थानीय उत्सर्जन भी दिल्ली की वायु गुणवत्ता तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
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