सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ दिल्ली: नई दिल्ली: दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई, कथित अवैध हिरासत और इंटरनेट सेवाओं पर रोक से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट मंगलवार, 3 नवंबर को सुनवाई कर रहा है। अदालत के समक्ष प्रदर्शनकारियों, वकीलों और पत्रकारों की ओर से दायर कई याचिकाएं सूचीबद्ध हैं। इनमें पुलिस पर कथित मारपीट, हिरासत और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में प्रतिबंध लगाने के आरोप भी शामिल हैं।

भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ इन मामलों की सुनवाई कर रही है। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन के दौरान कई लोगों को हिरासत में लिया गया और पत्रकारों को रिपोर्टिंग करने में बाधाओं का सामना करना पड़ा। मेट्रो और रेल सेवाओं पर प्रतिबंध तथा इंटरनेट कनेक्टिविटी बाधित किए जाने को लेकर भी अदालत में सवाल उठाए गए हैं।

इससे पहले 15 अक्टूबर को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए थे। अदालत ने सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को प्रदर्शन से जुड़े सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था। निजी व्यक्तियों और संस्थाओं को भी उपलब्ध वीडियो और रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने की अनुमति दी गई थी।

इससे पहले 11 अक्टूबर को अदालत ने निर्देश दिया था कि कानून-व्यवस्था की आवश्यकताओं के अधीन मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रूप से चलें, इंटरनेट सेवाएं बाधित न हों और लोगों की आवाजाही सुनिश्चित की जाए। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हिरासत भी कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप ही किए जाने की बात कही गई थी।

आज की सुनवाई में इन निर्देशों के पालन, पुलिस के जवाब और याचिकाओं में उठाए गए आरोपों पर आगे की न्यायिक कार्रवाई महत्वपूर्ण रहेगी।


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