सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ दिल्ली: नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की एसीपी मनस्वी वशिष्ठ से जुड़े विवाद में मंगलवार को नया घटनाक्रम सामने आया। वकीलों के खिलाफ कथित धमकी भरी टिप्पणी और AK-47 का जिक्र किए जाने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेने से इनकार कर दिया। अदालत ने वकीलों से कहा कि वे उपलब्ध साक्ष्यों के साथ औपचारिक याचिका दाखिल करें। कोर्ट ने आश्वासन दिया कि याचिका मिलने के बाद मामले पर विचार किया जाएगा।
यह मामला सोमवार, 2 नवंबर को दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर हुए प्रदर्शन से जुड़ा है। एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और अन्य पुलिसकर्मी अपने तबादलों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान वकीलों की ओर से आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन में कुछ पुलिस अधिकारियों ने अधिवक्ताओं के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया और AK-47 से जुड़ी धमकी दी। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का हवाला देते हुए वकीलों ने हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की।
मंगलवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांब्रे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ के सामने वकीलों ने मामले का उल्लेख किया। उन्होंने अदालत से स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करने का अनुरोध किया। इस पर पीठ ने कहा कि संबंधित सामग्री और आरोपों को औपचारिक याचिका के रूप में रजिस्ट्री में प्रस्तुत किया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिका दाखिल होने पर उसे सूचीबद्ध कर विचार किया जाएगा।
विवाद की शुरुआत 23 अक्टूबर को शाहदरा थाने में पुलिसकर्मियों और वकीलों के बीच हुई झड़प से हुई थी। इसमें अधिवक्ता ललित बंसल गंभीर रूप से घायल हुए थे। इसके बाद वकीलों ने हड़ताल की थी। 28 अक्टूबर को एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और इंस्पेक्टर अरुण कुमार का तबादला किया गया था।
2 नवंबर को दोनों अधिकारियों के तबादले के विरोध में पुलिसकर्मियों ने मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। इसके बाद गृह मंत्रालय ने एसीपी मनस्वी वशिष्ठ को निलंबित कर दिया। अब हाईकोर्ट में औपचारिक याचिका दाखिल होने के बाद इस विवाद पर आगे की न्यायिक कार्रवाई तय होगी।
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