आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : आप और मैं जिंदगी में सिर्फ चांस ले सकते हैं। जिसके पास कुछ नहीं है… वही तो चांस लेगा ना। अगर आप वाकई जिंदगी में आगे बढ़ना चाहते हैं तो अवसरों को कभी मत छोड़िए। जब तक सिर पर कफन नहीं बांधेंगे कि कुछ कर गुजरना है, तब तक सफलता नहीं मिलेगी।
गीता में लिखा है- तुम कैसे आगे बढ़ सकते हो? उसका जवाब है- अभय। बिना डरे आगे बढ़ते जाइए… हमेशा फ्रंट फुट पर खेलिए। कार्यक्रम था- प्रेरणा उत्सव और श्रोताओं से रूबरू थे वेदांता समूह के संस्थापक और चेयरमैन अनिल अग्रवाल।
दैनिक भास्कर समूह के चेयरमैन स्व. रमेशचंद्र अग्रवाल की स्मृति में आयोजित प्रेरणा उत्सव के दूसरे दिन भोपाल में वेदांता समूह के संस्थापक-चेयरमैन अनिल अग्रवाल का टॉक शो हुआ। टॉक शो में भास्कर समूह के डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल ने अनिल अग्रवाल से बातचीत की।
सवाल : बिहार से बम्बई पहुंचने की कहानी बेहद प्रेरणादायक है। उसके बारे में बताइए।
जवाब : मैं आपके जैसा ही हूं, कोई फर्क नहीं है आपमें और मुझमे। मैं बिहार में पला बढ़ा। मैं बॉलीवुड फिल्में देखा करता था। इच्छा रहती थी कि कभी डबल डेकर बस देखूं। कभी वहां की मल्टी स्टोरी बिल्डिंग्स देखूं। सोचा बम्बई जाऊंगा तो वो सब देखूंगा। बिजनेस तो करना था ही।
दरअसल जो इच्छाएं हमारे भीतर होती हैं… वही हमें आगे बढ़ाती हैं। मेरी मां का मैं बहुत ऋणी हूं। मैं जो कुछ भी हूं। मां की वजह से हूं। मेरी मां ने हम चार भाई-बहनों को खूब अच्छे से पाला। उन्हें घर चलाने के लिए सिर्फ चार सौ रुपए मिलते थे। इन्हीं में घर का भाड़ा देना और हम भाई-बहनों को पालना… बड़ी बात थी।
मुझे याद है मेरे पिताजी के पास लेम्ब्रेटा स्कूटर था और मैं पीछे बैठा करता था। मेरी एक ही इच्छा थी कभी मैं स्कूटर चलाऊं और वो मेरे पीछे बैठें।
सवाल: मान लीजिए कि आपका नाती 15 साल की उम्र में बोले कि मैं पढ़ाई छोड़ना चाहता हूं तो…आप क्या कहेंगे?
जवाब: एक बात तो पक्की है कि हम अपने बच्चों की तकदीर लिख नहीं सकते। हम उन्हें सिर्फ संस्कार दे सकते हैं। हमारा कंधा हमारे बच्चों के लिए हरदम तैयार है। वो कभी भी हमारे कंधे पर आकर सिर रख सकते हैं। तकदीर तो वो अपनी लिखवाकर लाए हैं, उसे हम नहीं बदल सकते। और जो लोग अपने बच्चों के प्यार में गलत करने लगते हैं… वो सबसे बड़े गुनहगार हैं।