सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : चीन में रोजगार और करियर को लेकर बढ़ती चिंता का असर अब युवाओं की धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी दिखाई दे रहा है। शंघाई का करीब 1,700 साल पुराना लोंगहुआ मंदिर इन दिनों युवा पीढ़ी के लिए खास आकर्षण बन गया है। यहां बड़ी संख्या में Gen-Z युवा अच्छी नौकरी, बेहतर वेतन, करियर में सफलता और आर्थिक स्थिरता की कामना लेकर पहुंच रहे हैं। वे अगरबत्ती जलाने, मंत्रों का जाप करने और बौद्ध प्रतिमाओं के सामने प्रार्थना करने के साथ अपनी इच्छाएं लाल रिबन पर भी लिख रहे हैं।

इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी वजह चीन के युवाओं के बीच रोजगार को लेकर बढ़ती अनिश्चितता बताई जा रही है। सीमित अवसर, कड़ी प्रतिस्पर्धा, वेतन में ठहराव और भविष्य को लेकर चिंता ने कई युवाओं को मानसिक दबाव में डाल दिया है। कुछ युवा नई नौकरी मिलने के बाद भी प्रोबेशन अवधि और प्रदर्शन को लेकर चिंतित हैं, जबकि कई स्नातक लंबे समय तक बेहतर अवसर की तलाश कर रहे हैं।

लोंगहुआ मंदिर में पहुंचने वाले युवा इसे केवल धार्मिक आस्था के रूप में नहीं देखते। कई लोगों के लिए मंदिर जाना कठिन समय में मानसिक शांति और उम्मीद हासिल करने का माध्यम भी है। मंदिर में लोग नौकरी में सफलता, परीक्षा में अच्छे अंक, आर्थिक मजबूती और करियर में तरक्की जैसी इच्छाएं लिखते हैं।

चीन में युवाओं का मंदिरों की ओर बढ़ता रुझान नया नहीं है, लेकिन रोजगार संकट के दौर में इसका स्वरूप अधिक स्पष्ट दिखाई दे रहा है। प्राचीन परंपराओं और आधुनिक करियर चिंताओं का यह मेल बताता है कि आर्थिक असुरक्षा केवल रोजगार के आंकड़ों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि युवाओं की सोच, जीवनशैली और भविष्य को लेकर उनकी उम्मीदों को भी प्रभावित करती है।


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