सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र, भोपाल में बसंत पंचमी के अवसर पर भारतीय शास्त्रीय गायन कार्यक्रम का आयोजन स्पिकमैके संस्था की ओर से किया गया।
इस कार्यक्रम में बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार विजेता मीता पंडित, पंडित कालीनाथ मिश्रा एवं श्रीमती पारोमिता मुखर्जी ने अपनी प्रस्तुति दी। मीता पंडित ने मीरा बाई के भजन “राम नाम रस पीजे मनवा” के सुरों से अद्भुत गायकी के स्वर बिखेर दिए। तबला वादन में पारंगत पंडित कालीनाथ मिश्रा ने अपनी प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। हारमोनियम पर संगतकार दी श्रीमती पारोमिता मुखर्जी ने, जो स्वर और वाद्य (वायलिन) संगीत में विशेषज्ञता रखती हैं।
बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक मनीषा श्रीवास्तव ने कार्यक्रम में प्रस्तुति देने वाले कलाकारों को सम्मानित करते हुए कहा कि संगीत की दुनिया बेमिसाल है, जहां पर स्वर और रागों का मिश्रण आपको एक अद्भुत दुनिया में ले जाता है। मरीजों के इलाज में भी म्यूजिक थेरेपी कारगर साबित हुई है। गायन और वादन का सुर संगम आपकी आत्मा के तारों को झंकृत कर देता है।
9 साल की उम्र में मंच पर अपनी कला का पहला प्रदर्शन करने वाली डॉ मीता पंडित एक हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायिका और ग्वालियर घराने की प्रमुख प्रतिपादक हैं। वे अपने परिवार की पहली महिला हैं जिन्होंने संगीत को पेशे के रूप में अपनाया है।
हरिहरपुर घराने के पंडित कालीनाथ मिश्रा का तबला वादन की दुनिया में बहुत ही लोकप्रिय प्रतिष्ठित नाम है। आपने कार्यक्रम में तबले पर संगत देते हुए बताया कि तबला सबसे पुराना वाद्य यंत्र है।
पारोमिता मुखर्जी स्वर और वाद्य (वायलिन) संगीत में विशेषज्ञता रखती हैं। वे पंडित वी.जी.जोग. जी की शिष्या हैं और वर्तमान में, वह उस्ताद अली अकबर खान के बेटे आशीष खान और बेटी अमीना परेरा से प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। उन्होंने शास्त्रीय गायन, ख्याल और ठुमरी का प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। उन्होंने भारत में कई संगीत समारोहों के शिखिर मंचो पर हारमोनियम एकल कला का प्रदर्शन किया है।