आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मध्यप्रदेश में भाजपा-कांग्रेस ने 90 हारे हुए नेताओं पर फिर से दांव लगाया है। इनमें 37 बीजेपी और 53 कांग्रेस के हैं। सात उम्मीदवार ऐसे भी हैं, जो दूसरी पार्टियों के टिकट पर विधानसभा चुनाव हार कर आए हैं।
बीजेपी के हारे हुए उम्मीदवारों की बात करें तो इनमें 23 एक बार तो 13 दो बार चुनाव हार चुके हैं। वहीं, कांग्रेस के 9 चेहरे दो बार चुनाव हारे हैं। 6 प्रत्याशी ऐसे भी हैं, जो तीन बार हार चुके हैं।
सबसे पहले जानिए कांग्रेस के ऐसे चेहरे जो तीन बार हारे
गोपाल सिंह इंजीनियर (आष्टा): हार के अंतर को कम किया तो मिला टिकट
गोपाल सिंह साल 2008 से कांग्रेस के टिकट पर लगातार हारते आ रहे हैं। पहली बार हार का अंतर 16 हजार था। वहीं 2018 में यह घटकर 6 हजार पर आ गया। वे इस सीट से एक बार भी जीत नहीं पाए हैं। हार के कम अंतर को देखते हुए कांग्रेस ने उन्हें चौथी बार मौका दिया है।
वंशमणि प्रसाद (देवसर): 33 हजार की लीड को 10 हजार पर लाए
वंशमणि प्रसाद दो बार कांग्रेस से और एक बार निर्दलीय चुनाव हार चुके हैं। कांग्रेस ने इस बार भी उन पर विश्वास जताया है। 2008 में पहली बार वे कांग्रेस प्रत्याशी रहते ही 33 हजार वोटों से हारे थे। 2013 में निर्दलीय लड़े और फिर हार गए। पिछले चुनाव में कांग्रेस से टिकट मिला, लेकिन जीत नहीं पाए। सिर्फ जीत का अंतर कम कर पाए थे। यह अंतर था 10 हजार वोट। इस बार कांग्रेस को लगता है कि वंशमणि ये सीट निकाल लेंगे।
आत्माराम पटेल (कसरावद)
हार का अंतर 10 हजार से 5 हजार पर लाए
कसरावद से बीजेपी प्रत्याशी आत्माराम पटेल पिछले दो विधानसभा चुनाव हार चुके हैं। 2013 में वे कांग्रेस के सचिन यादव से 11 हजार वोटों से हारे थे। इसके बाद 2018 में दोबारा सचिन यादव से 5 हजार वोटों से हारे। इस बार फिर उनका मुकाबला सचिन यादव से है।
अब समझिए, ऐसे चेहरे जिन्होंने 2018 में दूसरी पार्टी से शानदार परफॉर्म किया था, उनकी ताकत को देखते हुए भाजपा-कांग्रेस ने दांव लगाया है।
दूसरे दलों के सात वो चेहरे, जिन्हें बीजेपी और कांग्रेस ने दिया मौका
कैलाश कुशवाह (पोहरी), कांग्रेस
कांग्रेस कैंडिडेट ने बदला पाला तो कुशवाह की लगी लॉटरी
पोहरी विधानसभा से 2018 में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे। उस समय कांग्रेस उम्मीदवार सुरेश राठखेड़ा से 7 हजार वोटों से चुनाव हार गए थे। राठखेड़ा के बीजेपी में शामिल होने के बाद 2020 के उपचुनाव में फिर बसपा के टिकट से लड़े। दोबारा सुरेश राठखेड़ा से 22 हजार वोटों से हार गए। कांग्रेस के पास इस बार कैंडिडेट नहीं था, इसलिए कुशवाह को मैदान में उतारा।
महेंद्र यादव (कोलारस), बीजेपी
सिंधिया समर्थक, सात महीने के लिए रह चुके विधायक
कोलारस विधानसभा से 2018 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े और बीजेपी के वीरेंद्र रघुवंशी से 700 वोटों से चुनाव हार गए। 2020 में सिंधिया के साथ बीजेपी में शामिल हुए। इस बार बीजेपी के टिकट पर मैदान में हैं।
कपिध्वज सिंह ( गुढ़), कांग्रेस
2018 में की ‘साइकिल’ की सवारी, ‘पंजे’ को पीछे छोड़ा था
2018 में गुढ़ विधानसभा से सपा के टिकट पर चुनाव लड़े। बीजेपी के नागेंद्र सिंह से 7 हजार वोटों से हार गए और दूसरे नंबर पर रहे। इस बार कांग्रेस के टिकट पर फिर मुकाबला नागेंद्र सिंह से है।