सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ भोपाल: बिहार में भूमिहारों का दबदबा, यूपी में ब्राह्मण उम्मीदवारों की चर्चा तेज
लखनऊ/पटना। उत्तर प्रदेश और बिहार विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद जातीय समीकरणों को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। बिहार में आठ में से पांच सीटों पर भूमिहार समुदाय के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की, जबकि उत्तर प्रदेश में भाजपा के छह विजयी उम्मीदवारों में तीन ब्राह्मण समुदाय से बताए गए हैं। इन नतीजों ने दोनों राज्यों में उम्मीदवारों की सामाजिक पृष्ठभूमि और राजनीतिक दलों की चुनावी रणनीति पर ध्यान खींचा है। हालांकि, उम्मीदवारों की जाति के आधार पर पूरे समुदाय के मतदान व्यवहार का निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।
बिहार में पांच सीटों पर भूमिहार उम्मीदवार विजयी बिहार विधान परिषद की चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की कुल आठ सीटों के परिणामों में भूमिहार समुदाय के पांच उम्मीदवार विजयी हुए। इनमें पटना शिक्षक सीट से राजद के डॉ. संजीव कुमार, दरभंगा शिक्षक सीट से जन सुराज के डॉ. सुरेश प्रसाद राय, तिरहुत शिक्षक सीट से भाजपा के डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह, पटना स्नातक सीट से जदयू के नीरज कुमार और दरभंगा स्नातक सीट से भाजपा के सर्वेश कुमार शामिल हैं।
अन्य विजेताओं में कोसी स्नातक सीट से भाजपा के एन.के. यादव, सारण शिक्षक सीट से निर्दलीय राहुल राज और तिरहुत स्नातक सीट से निर्दलीय बंशीधर ब्रजवासी शामिल हैं। इस तरह नतीजों में अलग-अलग राजनीतिक दलों के भूमिहार उम्मीदवारों को सफलता मिली। उत्तर प्रदेश में भाजपा के तीन ब्राह्मण उम्मीदवार जीते उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों पर भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबला 6-5 के अंतर से समाप्त हुआ। भाजपा के छह विजयी उम्मीदवारों में तीन ब्राह्मण समुदाय से बताए गए हैं। इनमें लखनऊ शिक्षक सीट से उमेश द्विवेदी, मेरठ शिक्षक सीट से श्रीचंद शर्मा और गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट से ध्रुव कुमार त्रिपाठी शामिल हैं।
समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों की सामाजिक पृष्ठभूमि भी चर्चा में रही। पार्टी के पांच उम्मीदवारों में दो यादव समुदाय से, जबकि अन्य उम्मीदवार वैश्य, कायस्थ और कुर्मी समुदायों से बताए गए। चुनाव परिणामों में सपा ने पांच सीटें हासिल कीं, जबकि भाजपा ने छह सीटों पर जीत दर्ज की।
जातीय समीकरण और चुनावी रणनीति दोनों राज्यों के नतीजे दिखाते हैं कि विधान परिषद चुनावों में उम्मीदवारों की सामाजिक पृष्ठभूमि राजनीतिक चर्चा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है। बिहार में भूमिहार उम्मीदवारों की सफलता अलग-अलग दलों में देखने को मिली, जबकि उत्तर प्रदेश में भाजपा के विजयी उम्मीदवारों में ब्राह्मण प्रतिनिधित्व प्रमुखता से सामने आया।हालांकि, विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों का मतदाता आधार आम विधानसभा चुनावों से अलग होता है। इसलिए इन परिणामों को सीधे पूरे राज्य के जातीय जनमत का प्रतिबिंब नहीं माना जा सकता। उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पकड़, संगठन, स्थानीय मुद्दे और मतदाताओं से संपर्क भी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले इन नतीजों ने राजनीतिक दलों के सामाजिक प्रतिनिधित्व और उम्मीदवार चयन की रणनीति पर बहस को जरूर तेज कर दिया है।
Hashtags: #UttarPradeshState #Bhopal #बिहार #भूमिहारों #दबदबा #यूपी #ब्राह्मण #उम्मीदवारों #चर्चा #बिहारमेंभूमिहारोंका