आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के हॉस्टल की मेस तीसरे दिन भी बंद रही। छात्र दिनभर खाने के लिए परेशान होते रहे। एक तरफ छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन खाना बनाने वाले कर्मचारियों को आने से रोक रहा है। दूसरी तरफ प्रबंधन का कहना है कि हमारा कोई भी कर्मचारी खाना बनाने का काम नहीं करता है।

यह मेस को-ऑपरेटिव मेस है, जिसे छात्र खुद ऑपरेट करते हैं। वहीं, मेस में काम करने वाले कर्मचारियों की माने तो सभी विश्वविद्यालय प्रबंधन के सरकारी कर्मचारी हैं, जिन्हें हाल ही में प्रबंधन ने खाना बनाने से रोक दिया है। अब ये कर्मचारी विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं।

खुद खाना बना रहे 200 से अधिक छात्र

स्टूडेंट्स ने बताया कि लगातार तीसरे दिन भी मेस चालू नहीं हुई। हमारी मेस को-ऑपरेटिव है। हम लोग ही इसे ऑपरेट करते हैं। विश्वविद्यालय खाना बनाने के लिए कर्मचारी उपलब्ध कराता है। जिन्हें अब यहां आने से रोका जा रहा है। हमने तीसरे दिन भी नाश्ता और खाना खुद ही बनाया। इससे हमारी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। हमें उम्मीद थी कि खाने बनाने वाले कर्मचारी रविवार को आएंगे, लेकिन वे नहीं आए।

विश्वविद्यालय की छवि धूमिल कर रहे अराजक तत्व

रजिस्ट्रार आई के मंसूरी ने कहा, 10-15 दिन से बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के छात्रावासों में कुछ अराजक तत्व और पूर्व छात्र विश्वविद्यालय की छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं। वे यहां रहने वाले छात्रों को भड़का रहे हैं। वास्तविकता उनके दावे के विपरीत है। यही नहीं गर्ल्स हॉस्टल की छात्राओं को भी भ्रमित किया गया। इस वजह से इंदिरा कन्या छात्रावास की कुछ छात्राओं ने मेस के लिए कुक और पानी की समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपा था। हम बताना चाहते हैं कि विश्वविद्यालय में कुक के पद स्वीकृत ही नहीं है।

एक महीने पहले शुरू हुआ विवाद

हाल ही में विश्वविद्यालय में रैगिंग का मामला सामने आया था। जिसके चलते 12 छात्रों को निष्कासित किया गया। इसी वजह से यूजीसी के नियमानुसार विश्वविद्यालय परिसर में मौजूद हॉस्टल में जूनियर और सीनियर छात्रों को अलग-अलग शिफ्ट किया जाना है। इससे पहले जूनियर और सीनियर साथ में ही रहते आए हैं। अब छात्र अलग शिफ्टिंग का विरोध कर रहे हैं। जिसके चलते 27 अक्टूबर से जवाहर और मुंशी प्रेमचंद हॉस्टल में खाना नहीं बना। इन दोनों हॉस्टल में 200 से अधिक छात्र रहते हैं।

हमें प्रबंधन ने खाना बनाने से रोका: कर्मचारी

विवि में प्यून के पद पर कार्यरत राम बहादुर ने बताया कि हम लंबे समय से हॉस्टल में खाना बनाते आए हैं। हमें हाल ही में प्रबंधन के लोगों ने मना किया है। इसके बाद से हम हॉस्टल में खाना बनाने नहीं जा रहे हैं। इसी तरह तेज बहादुर गार्ड, सुधाकर और प्रेम नारायण विश्वविद्यालय में पदस्थ हैं। से सभी लंबे समय से हॉस्टल में खाना बनाने का काम कर रहे हैं।

हमारे पास कुक की कोई पोस्ट नहीं: कुलपति

बरकतउल्ला ​​​​​​विश्वविद्यालय के कुलपति ​एसके जैन ने बताया कि हम मेस नहीं चलाते हैं, मेस को-ऑपरेटिव है। इसे छात्र ही मैनेज करते हैं। हमारे यहां कोई कुक की पोस्ट नहीं हैं। हमने किसी प्रकार से किसी भी व्यक्ति को खाना बनाने से नहीं रोका है। वह छात्रों का खुद का मामला है। हम तो चाहते हैं कि यहां मेस का टेंडर हो जाए। मगर छात्र यह टेंडर नहीं होने दे रहे हैं। हम जल्द ही प्रोसेस कर देंगे। जिसके बाद वेंडर की जिम्मेदारी तय हो जाएगी। हमने नियमानुसार छात्रों को हॉस्टल शिफ्ट करने के लिए कहा है, ताकि आगे से रैगिंग के मामले सामने नहीं आएं। मगर छात्र शिफ्ट होना नहीं चाहते, इस वजह से वे ऐसा कर रहे हैं। हाल ही में छात्रों ने वॉर्डन की गाड़ी के कांच आदि भी फोड़ दिए थे।