आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भोपाल स्थित बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी की बंद मैस अब शुरू हो गई है। वहीं, दूसरी तरफ प्रबंधन की मानें, तो यहां अभी तक 209 में से सिर्फ 29 छात्रों ने हॉस्टल की फीस भरी है। छात्रों के विभागों से संपर्क करके फीस भरने के लिए कहा जा रहा है।

बता दें कि विश्वविद्यालय में चल रही अव्यवस्थाओं के चलते 28 अक्टूबर रात करीब 9 बजे छात्रों ने कुलपति एसके जैन के बंगले को घेर लिया था। इसके बाद पुलिस ने इन छात्रों को हटाया। छात्रों का कहना है कि हमारी प्रबंधन से बात हुई है। 25 नवंबर तक का समय दिया गया है। जब तक खाने आदि की व्यवस्थाएं ठीक नहीं होगी, तब तक फीस नहीं भरेंगे। जैसे ही, व्यवस्थाएं दुरुस्त होंगी, फीस जमा कर देंगे।

28 जूनियर और 1 सीनियर ने भरी फीस

प्रबंधन के अनुसार जवाहर हॉस्टल में करीब 130 छात्र हैं, जिनमें से 28 छात्रों ने इस सेशन की हॉस्टल फीस दी है। वहीं, मुंशी प्रेमचंद हॉस्टल के 79 छात्रों में से सिर्फ एक छात्र ने ही इस साल की फीस जमा की है। जवाहर में फर्स्ट ईयर के छात्र व मुंशी प्रेमंचद में सीनियर छात्र रहते हैं। इसके अलावा, अन्य हॉस्टल संजय गांधी में 59 छात्र हैं, यहां सिर्फ 46 छात्रों ने हॉस्टल फीस दी है।

दो दिन पहले लौटे खाना बनाने वाले कर्मचारी

छात्रों ने बताया कि 31 अक्टूबर को खाना बनाने वाले कर्मचारी वापस लौट आए थे। इसके बाद से मैस में खाने की दिक्कत दोबारा नहीं हुई है। विवि में प्यून के पद पर कार्यरत राम बहादुर ने बताया था कि उन्हें हाल में प्रबंधन ने हॉस्टल में खाना बनाने से मना किया था। इसके बाद से तेज बहादुर गार्ड, सुधाकर और प्रेम नारायण विश्वविद्यालय हॉस्टल नहीं जा रहे थे। बता दें कि तीन दिन तक छात्रों ने खुद ही खाना बनाया था।

यह था विवाद

हाल में विश्वविद्यालय में रैगिंग का मामला सामने आया था। इसके चलते 12 छात्रों को निष्कासित किया गया। इसी वजह से यूजीसी के नियमानुसार विश्वविद्यालय परिसर में मौजूद हॉस्टल में जूनियर और सीनियर छात्रों को अलग-अलग शिफ्ट किया जाना है। इससे पहले जूनियर और सीनियर साथ में ही रहते आए हैं। अब छात्र अलग शिफ्टिंग का विरोध कर रहे हैं। इसके चलते 27 अक्टूबर से जवाहर और मुंशी प्रेमचंद हॉस्टल में खाना नहीं बना। दोनों हॉस्टल में 200 से अधिक छात्र रहते हैं।

सिर्फ 29 छात्रों ने जमा की हॉस्टल फीस

बरकतउल्ला ​​​​​​विश्वविद्यालय के कुलपति ​एसके जैन ने बताया कि एक हॉस्टल में 28 व दूसरे में सिर्फ एक ही छात्र ने अपनी हॉस्टल फीस सब्मिट की है। हम चाहते हैं कि यहां मैस का टेंडर हो जाए। हम जल्द ही प्रोसेस कर देंगे। जिसके बाद वेंडर की जिम्मेदारी तय हो जाएगी।