आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : अगर आपको पहले से कोई बीमारी है। दवा लेने के बाद भी खांसी या बुखार भी ठीक नहीं हो रहा है तो इसे नजर अंदाज नहीं करें, क्योंकि इन दिनों अस्पतालों में वायरल फीवर के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। आमतौर पर 2-3 दिनों में वायरल ठीक हो जाता है, लेकिन इसके ठीक होने में सप्ताह भर से अधिक का समय लग रहा है।

डॉक्टर्स की मानें तो अगर आपको खांसी हो रही है और रुक नहीं रही, सांफ फूलना भी बढ़ रहा है तो तुरंत ही डॉक्टर को दिखाएं यह अपर रेस्पिरेटरी की बजाय निमोनिया भी हो सकता है। भोपाल के अस्पतालों में रोजाना 1000 हजार से अधिक मरीज अस्पतालों में पहुंच रहे हैं।

वायरल बुखार के लक्षण

वायरल बुखार आमतौर पर साधारण बुखार की तरह ही होता है। डॉक्टर्स के अनुसार शरीर में तेज दर्द, गले में खराश और दर्द, त्वचा पर हल्के धब्बे पड़ना, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, कमजोरी महसूस होना, सिर दर्द होने के साथ तेज बुखार, खांसी की शिकायत सहित अन्य लक्षण वायरल बुखार से जुड़े हैं।

कहां कितने वायरल के मरीज

अस्पताल       मरीजों की संख्या

हमीदिया 160 से अधिक

एम्स   170 से अधिक

BMHRC के आठों यूनिट  150 से अधिक

जेपी    150 से अधिक

बैरागढ़ बैरसिया स्वास्थ केंद्र     100 से अधिक

अन्य प्राइवेट अस्पताल   300 से अधिक

यह रखें सावधानियां

एम्स भोपाल के मेडिसिन विभाग के विभाग अध्यक्ष डॉक्टर रजनीश जोशी ने बताया कि दिसंबर, जनवरी और फरवरी माह में मौसम बदलता है। इसके साथ कुछ संक्रमित रोगों का प्रभाव बढ़ जाता है। इसमें खांसी जुकाम और हल्का बुखार होना शामिल है।

बीमारियों की रोकथाम के लिए सावधानियां बरतना जरूरी है, इसके लिए खास तौर पर यह ध्यान रखें कि ठीक से हाथ धोएं। घर में किसी भी व्यक्ति को खांसी सर्दी और जुकाम है वह व्यक्ति और अधिक बार धोए, ताकि संक्रमण को रोका जा सकता है।

घर में सबसे पहले हाथ धोंए, कई बार हाथों को धोंए

डॉक्टर रजनीश जोशी ने बताया कि आम तौर पर दो से तीन दिनों में वायरल ठीक हो जाता है, कुछ प्रकार के ऐसे इंफेक्शन ठीक होने में लंबा समय लेते हैं। अगर आपका बुखार ठीक हो गया है खांसी कम हो गई है तो यह कह सकते हैं कि यह ठीक होने की तरफ बढ़ रहा है।

कुछ लोग जिनको पहले से कुछ बीमारियां हैं और उनको सांस फूलने और खांसी में कोई कमी नहीं है तो वह लोग जरूर संभल जाएं, और यह सब तीन से पांच दिन के अंदर ठीक नहीं हो रहा है तो यह अपर रेस्पिरेटरी की बजाय निमोनिया भी हो सकता है। ऐसी कंडीशन में डॉक्टर को जरूर दिखाएं। ऐसी कंडीशन में थोड़ी अधिक दवाईयां लेनी पड़ सकती हैं।