सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस के अवसर पर एक व्याख्यान का आयोजन किया गया। व्याख्यान का शीर्षक था, “सभी के लिए स्वतंत्रता समानता और न्याय”कार्यक्रम में मुख्य वक्ता रूप में मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष मनोहर ममतानी उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि, हमें अपने अधिकारों के साथ ही कर्तव्यों का ध्यान रखना चाहिए।

श्री ममतानी ने अपने वक्तव्य में कहा कि, 10 दिसंबर 1948 को संयुक्त राष्ट्र संघ में मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा की गई। यह वह अधिकार थे जो विश्व में हर जगह लागू होते हैं । इसी समय भारत में संविधान का निर्माण हो रहा था। इसलिए भारतीय संविधान निर्माण कर्ताओं ने इन मानव अधिकारों का प्रावधान हमारे संविधान में किया उन्होंने कहा कि, हमारा संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है ।

श्री ममतानी ने मानव अधिकारों के लागू होने की पृष्ठभूमि की विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि, हमारे संविधान में मौलिक अधिकारों के साथ-साथ मौलिक कर्तव्यों का भी उल्लेखित हैं। उन्होंने बताया कि, 1993 में भारत में मानव अधिकार आयोग की स्थापना की गई और इसके साथ ही विभिन्न राज्यों में भी मानव अधिकार आयोग स्थापित हुए। उन्होंने यह भी बताया कि हमें अपने न्याय और स्वतंत्रता के लिए स्वयं ही प्रयास करना होगा।

ममतानी ने कहा कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मानव अधिकार के संरक्षण और क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने उपस्थित श्रोताओं का आवाह्न किया कि, हमें दूसरों को अधिकार दिलाने के लिए भी आगे आकर मन से प्रयास करना होगा। मानव अधिकारों के संरक्षण पोषण और संवर्धन के लिए हम सभी को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य की बदहाल व्यवस्थाओं पर चिंता जाहिर की। ममतानी ने यह भी बताया कि, किस प्रकार सूचना संचार तकनीक ने हमें स्वतंत्र किया है।

किंतु इसके साथ ही उससे हमारी निजता के अधिकार का भी हनन होता है। अतः हमें अपने निजता के अधिकार के संरक्षण की आवश्यकता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए, मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति संजय तिवारी ने कहा कि, मानव अधिकारों के क्षेत्र में भारत विश्व के लिए रोल मॉडल है। हमारी भारतीय संस्कृति में सर्वे भवंतु सुखिना, सर्वे संत निरामया की धारणा पूर्व से ही रही है ।

हम सभी विश्व के कल्याण की कामना करते हैं। कार्यक्रम का संचालन विश्वविद्यालय की वरिष्ठ सलाहकार, साधना सिंह बिसेन के द्वारा किया गया । एवं अंत में आभार प्रदर्शन विश्वविद्यालय के निदेशक रतन सूर्यवंशी द्वारा किया गया । कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव अनिल कुमार शर्मा सहित विश्वविद्यालय के समस्त विद्यार्थी, अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित थे।