आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने खुद को CM की दौड़ से बाहर बताते हुए कहा है, ‘मैं दिग्विजय या कमलनाथ नहीं, जो कुर्सी की होड़ में रहूं। मेरे परिवार का कोई भी सदस्य कभी कुर्सी के पीछे नहीं भागा।’

दैनिक भास्कर के साथ विशेष बातचीत में चुनाव में धर्म की एंट्री के सवाल पर बोले, ‘धर्म की एंट्री भाजपा ने नहीं, बल्कि I.N.D.I.A. गठबंधन और कांग्रेस ने करवाई है। उन्होंने ही सनातन धर्म को नष्ट करने का बयान दिया था।’

पढ़िए बातचीत के अंश…

  1. 20 साल से सत्तारूढ़ भाजपा को पीएम मोदी के चेहरे पर चुनाव क्यों लड़ना पड़ रहा है?

सिंधिया: भाजपा का सामूहिक नेतृत्व चुनाव लड़ रहा है। इस सामूहिक शक्ति में सबसे महत्वपूर्ण भाग अगर किसी का है तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का है। सारे केंद्रीय मंत्री, सांसद और स्टार प्रचारक प्रधानमंत्री, नड्डा जी और गृहमंत्री के नेतृत्व में चुनाव लड़ रहे हैं।

  1. चेहरा बदलने की वजह कहीं एंटी इनकम्बेंसी तो नहीं?

सिंधिया: बिल्कुल नहीं। एंटी इनकम्बेंसी की स्थिति वह होती है, जो 2003 में कांग्रेस की थी। वो 37 सीट पर सिमट गई थी। कांग्रेस ने एंटी इनकम्बेंसी का गुब्बारा जनता के समक्ष ले जाने की बहुत कोशिश की। पर जनता ने फोड़ दिया। सात आक्रोश यात्राएं टांय-टांय फिस्स रहीं। हमारी 5 जन आशीर्वाद यात्राओं को ऐतिहासिक प्यार मिला। कोई एंटी इनकम्बेंसी नहीं है।

  1. चुनाव में मुद्दा विकास का, फिर धर्म की एंट्री क्यों हो रही है?

सिंधिया: चुनाव प्रचार में धर्म की एंट्री भाजपा ने नहीं करवाई। एंट्री करवाई ‘I.N.D.I.A.’ और कांग्रेस ने, जब उन्होंने बयान दिया कि सनातन धर्म को नष्ट करके छोड़ेंगे। हम भारत माता के सपूत हैं। सनातन को नष्ट करने की बात करने वाले के विरुद्ध चट्टान की तरह खड़े होंगे। राम मंदिर भाजपा के अनेक योद्धाओं का सपना था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में इसे संकल्प में परिवर्तित कर दिया।

  1. आप खुद को सीएम की दौड़ से बाहर बता रहे हैं? अगर पार्टी आपको जिम्मेदारी दे तो…?

सिंधिया: मैं था कब? जब कांग्रेस में था, तब तत्कालीन अध्यक्ष ने मेरा और कमलनाथ जी का नाम लिया था। नतीजे आने पर कहा कि उन्हें बनाएंगे। मेरी कोई अभिलाषा होती तो दो-तीन दिन तो संघर्ष चलता। मैंने एक सेकंड में कहा कि मैं पूर्ण समर्थन करता हूं। सिंधिया परिवार का कोई भी सदस्य कभी कुर्सी के पीछे नहीं भागा। मेरा लक्ष्य स्पष्ट है- मप्र में सामूहिक नेतृत्व में भाजपा सरकार बने। मैं दिग्विजय या कमलनाथ नहीं, जो कुर्सी की होड़ में रहूं।

  1. ओपीएस, मुन्नालाल, गिर्राज जैसे लोग वर्षों से आपके साथ जुड़े हैं, उन्हें टिकट नहीं मिला, क्या कार्यकर्ताओं में नाराजगी है?

सिंधिया: जिनको टिकट मिला आप उनकी बात क्यों नहीं करते? चाहे कोई भी हों, अंतत: सभी भाजपा कार्यकर्ता हैं। कोई मेरा नहीं, कोई तेरा नहीं। मैं पूरी भाजपा के कार्यकर्ताओं के साथ कार्यकर्ता के रूप में काम कर रहा हूं। ये भ्रम तोड़ना होगा कि ये आपके हैं, ये उनके हैं। ऑल फॉर वन एंड वन फॉर ऑल। यही भाजपा की पद्धति है।

  1. लेकिन, टिकटों पर कई जगह विरोध और बगावत है। कैसे नियंत्रित करेंगे?

सिंधिया: आवागमन कौन से चुनाव में नहीं होता। आप ऐसे बात कर रहे हैं कि 1947 के बाद ये पहला चुनाव है, जहां लोग इधर-उधर जा रहे हैं। ये सदैव होता है। भाजपा में 230 सीटों पर देखेंगे तो ऐसे ज्यादा से ज्यादा 5% लोग हैं। 8-10 लोग इधर से उधर गए हैं। कांग्रेस को देखो। वहां तो गाली देने की पावर ऑफ अटॉर्नी दी जा रही है। एक पूर्व मुख्यमंत्री कह रहा है कि दूसरे के कपड़े फाड़ो। पुतले फूंके जा रहे हैं। क्या नहीं हो रहा है। स्थिति ये हो गई है कि सिख समाज के बारे में कमलनाथ को क्लीनचिट देने के लिए पंजाब से राजा बरार जी को ला रहे हैं।