सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: जीव-विज्ञान के क्षेत्र में जैव विविधता अध्ययन का एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण और अभिन्न विषय है। देशभर में जैव विविधता और उसके विभिन्न पहलुओं पर बहुत काम हो रहा है। किसी भी शोध में सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा कार्यप्रणाली का होता है l सोशल प्लेटफ़ॉर्म के युग में किसी भी विशिष्ट कारक पर डेटा प्राप्त करना बहुत आसान हो गया है, कार्यप्रणाली का हिस्सा पीछे छूट गया है और कोई भी तरीकों की वैज्ञानिक सटीकता के बारे में बात नहीं कर रहा है, परंतु छात्र सही वैज्ञानिक तरीकों की तलाश में रहते हैं।
जैव विविधता की गणना, सर्वेक्षण आदि करने की सही पद्धति और जैव विविधता डेटा में सांख्यिकीय का प्रयोग करने के हेतू बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल द्वारा एक राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया ।
वेबिनार युवा विद्वानों को शोध करने के सही वैज्ञानिक तरीकों से अवगत कराने का एक प्रयास था l ताकि वे सक्षम मार्गदर्शन में आगे बढ़ सकें और आने वाली पीढ़ियों तक वैज्ञानिक ज्ञान को आगे बढ़ा सकें।
बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल द्वारा दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया| यह राष्ट्रीय संगोष्ठी “बायोडायवर्सिटी: कलेक्शन एंड इवैल्यूएशन” विषय पर की गई. इस विषय में देश के प्रतिष्ठित संस्थाओं से वक्ताओं ने भाग लिया | इस संगोष्ठी में फैयाज खुदसर दिल्ली विश्वविद्यालय, शरद कुमार अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, एम सेनराज जूलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया चेन्नई, और और याहया बख्तियार कश्मीर यूनिवर्सिटी, विशेष वक्ता के रूप में शामिल हुए इस संगोष्ठी का आयोजन बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के पर्यावरण एवं सरोवर विज्ञान विभाग के द्वारा किया गया | दो दिवसीय संगोष्ठी में लगभग 90 छात्रों ने आनलाइन माध्यम से भाग लिया |
इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य छात्रों एवं शोधार्थियों को जैव विविधता में आने वाली विभिन्न प्रकार की मुख्य तकनीकों से अवगत कराना था | इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में वक्ताओं ने इकोलॉजिकल रेस्टोरेशन टाइगर, टाइगर सर्वे, कीटों के पकड़ने के वैज्ञानिक तरीके एवं मछलियों के अध्यन के वैज्ञानिक तरीकों के बारे में अपने व्याख्यान दिए | इस संगोष्ठी के पेट्रन बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय के कुलपति सुरेश कुमार जैन एवं इस राष्ट्रीय संगोष्ठी की कन्वीनर डॉक्टर अभिलाषा भावसार विभागाध्यक्ष पर्यावरण एवं सरोवर विज्ञान विभाग थे |