आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : श्यामला हिल्स स्थित बाल भवन स्कूल के सेकंड स्टेंडर्ड के बच्चों को गुरुवार को राष्ट्रीय मानव संग्रहालय की सैर कराई गई। कार्यक्रम की को-ऑर्डिनेटर रजनी द्विवेदी ने बच्चों को पूर्वजों के मकान और खाना बनाने की तकनीक बताई। संग्रहालय में बने वैसे मकान भी बच्चों को दिखाए गए, जिनमें कभी हमारे पूर्वज रहते थे। उन्हें मानव जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई।

रजनी द्विवेदी ने बच्चों को मानव सभ्यता के विकास की कहानी समझाते हुए कहा कि पहले मानव छोटी-छोटी गुफाओं और उसके बाद झोपड़ियों में रहते थे। सभ्यता का विकास हुआ, तो हमारे पूर्वजों ने कच्चे मकान बना लिए। फिर बिल्डिंग बनीं, जिनमें अब हम रहते हैं। यह मानव जीवन की उन्नति की ही निशानी है। विज्ञान के लगातार विस्तार की वजह से आज मानव जीवन आसान और सुलभ हो गया है।

इस दौरान बच्चों ने गेहूं भरने के पुराने बर्तन, औजार, खाना बनाने की पुरानी तकनीक, प्राचीन समय की जुगाड़ विधि, वाद्य यंत्रों को भी देखा। बच्चों ने खेती करने के साधनों एवं आवागमन की पुरानी प्रचलन प्रक्रिया को भी देखा और समझा। इस अवसर पर दुर्रे शावर, अब्दुल हसीब सहित सेकंड स्टेंडर्ड के सभी शिक्षक एवं शिक्षिकाएं मौजूद थे।

स्कूल के बच्चों को देश के विभिन्न क्षेत्रों में निवास करती विभिन्न जातियों और समाजों की सभ्यता और संस्कृति से भी परिचित कराया गया। उन्हें यह भी बताया गया कि किस जाति के लोग कहां रहते हैं और वे किस कार्य में निपुण हैं।

शिक्षकों ने बताया कि कैसे हमारे पूर्वज रोजमर्रा के काम करते थे। वे शिकार करने और लड़ाईयां लड़ने में किन हथियारों का उपयोग करते थे। देश के विभिन्न राज्यों और अंचलों में उपयोग किए जाने वाले हथियार भी उन्हें दिखाए गए, जो संग्रहालय में हैं।