आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : राजधानी से सटी बैरसिया विधानसभा सीट पर चुनाव प्रचार रोचक होने लगा है। यहां अंतिम दिन कांग्रेस की प्रत्याशी जयश्री हरिकरण को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और बीजेपी के विष्णु खत्री को यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की चुनावी सभाओं से जीत की संजीवनी मिलने की उम्मीद है। दोनों ही दलों के प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ इस समय गांवों में जनसंपर्क तेज कर वोटर्स को लुभाने में जुटे हैं।
बैरसिया विधानसभा क्षेत्र राजधानी भोपाल का ग्रामीण वोटर बाहुल्य क्षेत्र है। यहां 2.40 लाख मतदाता 17 नवंबर को वोटिंग करेंगे। अधिकतम वोट जुगाड़ने और वोटर को साधने के जतन कांग्रेस-भाजपा दोनों ही दलों के नेता और प्रत्याशी कर रहे हैं। वर्तमान विधायक विष्णु खत्री को विकास के कामों और पार्टी के परंपरागत वोटों से जीत मिलने का पूरा भरोसा है।
वहीं, जयश्री बीजेपी के झूठे वादों और शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं में कमी के मुद्दे लेकर जनता के बीच पहुंच रही हैं। बीजेपी के गढ़ माने जा रहे इस विधानसभा क्षेत्र में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को चुनावी सभा करके पार्टी कैंडिडेट के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की है। मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह यहां जनसभा और जनसंपर्क करने वाले हैं।
अंतिम दिन योगी आदित्यनाथ और खड़गे लेंगे सभा
चुनाव प्रचार के अंतिम दिन 15 नवंबर को दोनों ही राजनीतिक दलों की ओर से यहां बड़ी सभाएं करने की तैयारी है। इस विधानसभा क्षेत्र के देव बरखेड़ा में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की बड़ी चुनावी सभा बुधवार को होने वाली है। योगी की इस सभा के माध्यम से बीजेपी बैरसिया के अलावा शमशाबाद, नरसिंहगढ़, सीहोर, ब्यावरा विधानसभा क्षेत्रों के मतदाताओं को भी साधने का काम करना चाहती है।
देव बरखेड़ा में जिस दिन योगी आदित्यनाथ की सभा होगी उस दिन भाई दूज के त्यौहार के चलते यहां लाखों लोगों का मेला भी लगेगा। दूसरी ओर चुनाव प्रचार के अंतिम दिन कांग्रेस की ओर से भी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे चुनावी सभा करके जय श्री के लिए माहौल बनाने का काम करेंगे। इस दौरान खड़गे बीजेपी सरकार पर चुनावी हमले करेंगे।
गुर्जर-अहिरवार समाज के निर्णायक वोट
इस विधानसभा सीट पर गुर्जर समाज सबसे निर्णायक वोटर माना जाता है। इस समाज के यहां करीब 45 हजार वोटर हैं। 40 हजार वोटर अहिरवार समाज से हैं। दोनों ही राजनीतिक दल इन दोनों समाज के लोगों को साधने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले चुनाव में भी इस सीट पर दोनों ही दलों के यही प्रत्याशी आमने-सामने थे। इसलिए ये वोटर के मूड को भांपने और चुनावी जीत हार का गणित लगाते हुए सामाजिक मिलन को बढ़ावा दे रहे हैं।
रत्नाकर ने पिछले चुनाव में पैदा की थी दिक्कत
बीजेपी को पिछले चुनाव में पूर्व विधायक ब्रह्मानंद रत्नाकर की बगावत का सामना करना पड़ा था। उन्हें करीब 13 हजार वोट मिले थे। इस बार रत्नाकर वापस बीजेपी में आ गए हैं। इसलिए बीजेपी को भितरघात का खतरा ज्यादा नहीं है।