सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच अब बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर भी संकट गहराता नजर आ रहा है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने यमन के लाल सागर तट पर अपनी पकड़ मजबूत करते हुए रणनीतिक मयून (पेरिम) द्वीप तक पहुंच बना ली है। यह द्वीप बाब-अल-मंदेब के बीच स्थित है और वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और यूरोप-एशिया के बीच तेल व अन्य सामान की आवाजाही के प्रमुख रास्तों में शामिल है। होर्मुज जलडमरूमध्य में संकट के बाद यह मार्ग सऊदी अरब के लिए तेल निर्यात का एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक रास्ता बन गया है। ऐसे में यहां अस्थिरता बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
रॉयटर्स के मुताबिक, हूतियों की बाब-अल-मंदेब क्षेत्र तक पहुंच से ईरान को एक दूसरे महत्वपूर्ण समुद्री गलियारे पर रणनीतिक बढ़त मिल सकती है। हालांकि, हूती पक्ष ने अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी के लिए खतरा नहीं होने का दावा किया है और कहा है कि सऊदी जहाजों को छोड़कर अन्य जहाजों की आवाजाही सुरक्षित रहेगी।
इस घटनाक्रम का असर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक शिपिंग लागत पर पड़ रहा है। तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई हैं और अगर जहाजों को लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ा तो एशिया तक तेल पहुंचने में अतिरिक्त समय और खर्च लग सकता है।
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