सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), भोपाल ने अपनी पीडीयाट्रिक ट्रॉमा एवं इमर्जेंसी सेवाओं की पहली वर्षगांठ मनाई। चार बिस्तरों की मामूली सुविधा के साथ शुरू हुई ये सेवाएं अब बढ़कर दस बिस्तरों की हो गई। पिछले एक वर्ष में एम्स, भोपाल ने अपनी बाल चिकित्सा ट्रॉमा और आपातकालीन सेवाओं में लगभग 12,000 बच्चों का सफलतापूर्वक इलाज किया, जो इस क्षेत्र में युवा रोगियों की देखभाल में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
इस अवसर पर आजोजित कार्यक्रम में बोलते हुए, एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक अजय सिंह ने बच्चों की अनूठी ज़रूरतों और संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि बच्चों की प्रभावी देखभाल के लिए एक अलग मानसिकता की आवश्यकता है। सिंह ने बाल चिकित्सा आघात और आपातकालीन केंद्र में कुशलतापूर्वक काम करने के लिए नर्सिंग स्टाफ और अन्य सहायक कर्मियों को संवेदनशील बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। सिंह ने देश भर में एम्स भोपाल की सेवाओं की मान्यता पर खुशी व्यक्त करते हुए बताया कि, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू), लखनऊ के कुलपति ने उनके संस्थान में पीडीयाट्रिक ट्रॉमा एवं इमर्जेंसी सेवाओं की स्थापना के लिए एम्स भोपाल से मार्गदर्शन एवं सहायता मांगी है जो बाल चिकित्सा देखभाल में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में एम्स, भोपाल की बढ़ती प्रतिष्ठा को दर्शाता है।
इसके अतिरिक्त अजय सिंह ने स्लोगन लेखन, डिजिटल कॉमिक कहानी निर्माण, क्विज़, स्किट आदि सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार भी प्रदान किए। इन गतिविधियों का आयोजन बाल चिकित्सा आघात और आपातकालीन सेवाओं के महत्व पर कर्मचारियों और आम जनता दोनों को शामिल करने और शिक्षित करने के लिए किया गया था। इससे पूर्व ट्रॉमा और इमरजेंसी मेडिसिन के प्रमुख यूनुस खान ने उपस्थिति का स्वागत किया। इस अवसर पर राजेश मलिक, डीन (अकादमिक) और शशांक पुरवार, चिकित्सा अधीक्षक ने भी अपने विचार व्यक्त किए जिसमें विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए एम्स, भोपाल की प्रतिबद्धता पर जोर दिया गया।