सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भारत के स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को शिक्षा का हिस्सा बनाने को लेकर शिक्षकों के बीच मजबूत समर्थन दिखाई दे रहा है, लेकिन संस्थागत स्तर पर इसकी तैयारी अभी काफी पीछे है। QS I-GAUGE की नई रिपोर्ट के अनुसार, 91 प्रतिशत शिक्षक मानते हैं कि छात्रों के शैक्षणिक कार्य में AI के इस्तेमाल की स्पष्ट सीमाएं और नियम तय किए जाने चाहिए। वहीं, देश के केवल 13 प्रतिशत स्कूलों में AI का उन्नत और पूरे संस्थान में व्यवस्थित एकीकरण हो पाया है।
रिपोर्ट के मुताबिक 25 प्रतिशत स्कूलों ने AI को लेकर संरचित स्तर पर काम शुरू किया है, जबकि इतने ही स्कूल अभी इसके प्रयोग और संभावनाओं की शुरुआती पड़ताल कर रहे हैं। इसका अर्थ है कि बड़ी संख्या में स्कूल अभी AI को नियमित शिक्षण व्यवस्था में प्रभावी ढंग से शामिल करने की स्थिति में नहीं पहुंचे हैं। शिक्षकों की इच्छा और स्कूलों की वास्तविक क्षमता के बीच यही अंतर AI शिक्षा के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है।
AI को लेकर शिक्षकों की चिंता केवल तकनीकी सुविधाओं तक सीमित नहीं है। शिक्षा में AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ अकादमिक ईमानदारी, छात्रों की गोपनीयता, अत्यधिक निर्भरता और स्वतंत्र सोच पर संभावित असर जैसे सवाल भी सामने आए हैं। उच्च शिक्षा से संबंधित QS I-GAUGE सर्वे में 78 प्रतिशत फैकल्टी सदस्यों ने आशंका जताई कि AI का अत्यधिक इस्तेमाल छात्रों की स्वतंत्र सोच और समस्या समाधान की क्षमता को कमजोर कर सकता है।
इस सर्वे में K-12 स्तर के 21 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 71 संस्थानों के 1,209 शिक्षकों की प्रतिक्रियाएं शामिल थीं। रिपोर्ट बताती है कि AI को शिक्षा में शामिल करने के लिए केवल तकनीक उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं होगा। शिक्षकों का प्रशिक्षण, स्पष्ट नीतियां, जिम्मेदार उपयोग के नियम और डिजिटल बुनियादी ढांचा भी जरूरी होगा। ऐसे में भारत के सामने चुनौती AI अपनाने की नहीं, बल्कि इसे सुरक्षित, प्रभावी और समान अवसर वाली शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाने की है।
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