आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : जबलपुर शहर की तीन विधानसभा सीट जहां कभी भाजपा तो कभी कांग्रेस काबिज रहती है, पर शहर की कैंट विधानसभा सीट में बीते तीन दशकों से एक ही परिवार का कब्जा है। कैंट विधानसभा में जीत के लिए कई दिग्गज कांग्रेस नेता चुनाव लड़े, पर भाजपा का तिलिस्म नहीं तोड़ पाए। 1993 से आज तक कैंट में एक ही परिवार का वर्चस्व है, और यह परिवार है रोहाणी परिवार। पिता की सीट पर अब पुत्र दो बार से विधायक है। हालांकि कांग्रेस का इस बार दावा है कि वो निश्चित रूप से भाजपा का तिलिस्म तोड़कर कैंट में कांग्रेस का झंडा लहराऐगें।

जबलपुर की कैंट विधानसभा…1993 से पहले तक ये सीट कांग्रेस का गढ़ कही जाती थी। पर इसके बाद से यह सीट भाजपा का गढ़ बन गई। 1993 में पहली बार यहां से ईश्वरदास रोहाणी ने चुनाव जीता था, जिसके बाद से यह सीट भाजपा और रोहाणी परिवार की अजय सीट हो गई। पिता स्व ईश्वरदास रोहाणी के बाद यहां से पुत्र उनके पुत्र अशोक रोहाणी चुनाव जीतते आ रहें है। 2023 के चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर अशोक रोहाणी को चुनाव मैदान में उतारा है, तो वही कांग्रेस ने हर बार की तरह इस बार भी प्रयोग करते हुए नए प्रत्याशी को टिकट दी है। कांग्रेस ने अभिषेक चिंटू चौकसे को अशोक रोहाणी के सामने चुनावी मैदान में उतारा है।

1993 के पहले तक जबलपुर की कैंट विधानसभा सीट पर कांग्रेस काबिज थी। 1993 में पहली बार भाजपा ने विधानसभा चुनाव जीता। ईश्वरदास रोहाणी ने कांग्रेस प्रत्याशी बाबू चंद्रमोहन को हराकर कैंट में भाजपा का परचम लहराया। इसके बाद से ईश्वरदास रोहाणी ने कैंट विधानसभा सीट से लगातार चार बार चुनाव जीता। उनके निधन के बाद 2013 से इस सीट पर उनके पुत्र अशोक रोहाणी चुनाव जीत रहें है। 1972 में कैंट सीट अस्तित्व में आई थी । तब से लेकर आज तक 11 चुनाव हुए है, जिसमें पांच बार कांग्रेस ने और छह बार भाजपा ने चुनाव जीता है।

2023 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर से अशोक रोहाणी को टिकट दिया है, तो वही कांग्रेस ने अभिषेक चिंटू चौकसे को मैदान में उतारा है। भाजपा प्रत्याशी अशोक रोहाणी का कहना है कि कांग्रेस हर बार नया प्रत्याशी चुनाव में खड़ा करती है, और फिर चुनाव हारने के बाद अपने घर चले जाते है। साढ़े चार साल कोई भी कांग्रेस नेता जनता के बीच नहीं जाता, पर जैसे ही चुनाव आते है तो कांग्रेस अपने प्रत्याशी खड़ा कर देते है, और फिर उन्हे हार का सामना करना पड़ता है। कैंट विधानसभा के प्रत्याशी अशोक रोहाणी का कहना है कि भाजपा का हर कार्यकर्ता आत्मविश्वास के साथ मैदान में है, और इस बार भी ऐतिहासिक जीत के साथ कैंट में भाजपा का परचम लहराएगा।

1993 से भाजपा के सामने कांग्रेस हर बार एक नया प्रत्याशी खड़ा करती है, पर रोहाणी परिवार का तिलिस्म नहीं टूटता है। कांग्रेस ने कैंट विधानसभा ने इस बार अभिषेक चौकसे को टिकट दिया है। अभिषेक चौकसे का कहना है कि जैसे कैंट छावनी में उपाध्यक्ष रहते हुए मै जनता की सेवा कर रहा हूं, उसी तरह से विधायक बनने के बाद कैंट में विकास करेंगे, क्योंकि यहां पर काम करने को बहुत कुछ है। आज भी कई ऐसे क्षेत्र है जहां पानी नहीं पहुंच रहा है। स्वास्थ्य सुविधा की कमी है। शिक्षा का अभाव है। ऐसे कई मु्द्दे है, जिनको लेकर हम कैंट की जनता के सामने जा रहे हैं, और निश्चित रूप से 2023 में भाजपा और रोहाणी परिवार का तिलिस्म टूटेगा। यहां से कांग्रेस का विधायक बनेगा।