सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भारत से सस्ती बिजली मिलने के बावजूद चीन को ज्यादा पैसे क्यों देगा बांग्लादेश?

नई दिल्ली: बांग्लादेश की बिजली खरीद को लेकर एक दिलचस्प मामला सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश ढाका में कचरे से बिजली बनाने वाली एक चीनी कंपनी से बिजली खरीदने जा रहा है और इसके लिए उसे भारत से मिलने वाली बिजली की औसत कीमत से करीब 127 प्रतिशत ज्यादा भुगतान करना होगा। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब बांग्लादेश ने भारत की ओर से बिजली आपूर्ति शुल्क में मामूली बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है।

रिपोर्ट के अनुसार, चीन की कंपनी से मिलने वाली बिजली की कीमत भारतीय सप्लायर्स से मिलने वाली औसत दर की तुलना में काफी अधिक है। यही वजह है कि बांग्लादेश के ऊर्जा क्षेत्र में इस सौदे की लागत को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

भारत से कितनी सस्ती मिल रही है बिजली?

बांग्लादेश लंबे समय से भारत से बिजली आयात करता रहा है। भारत से आने वाली बिजली में अलग-अलग कंपनियों और समझौतों के आधार पर दरें अलग होती हैं। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, सरकारी कंपनी NTPC Vidyut Vyapar Nigam Limited (NVVN) से आयातित बिजली के लिए बांग्लादेश करीब 7.58 टका प्रति यूनिट, ट्रांसमिशन शुल्क समेत, चुका रहा था।

वहीं, भारत के झारखंड स्थित गोड्डा पावर प्लांट से बांग्लादेश को बिजली की आपूर्ति अदाणी पावर द्वारा की जाती है। इस समझौते की कीमत को लेकर बांग्लादेश में पहले से विवाद रहा है और वहां की एक सरकारी समीक्षा समिति ने इसे बाजार दरों की तुलना में महंगा बताया था।

फिर चीन से महंगी बिजली क्यों?

चीन से बिजली खरीदने का मामला सामान्य बिजली आयात से थोड़ा अलग है। यहां बिजली ढाका में कचरे से बिजली उत्पादन करने वाली परियोजना से जुड़ी है। यानी यह सिर्फ दूसरे देश से तैयार बिजली खरीदने का मामला नहीं, बल्कि शहरी कचरे के निपटारे और बिजली उत्पादन को एक साथ जोड़ने वाली परियोजना है।

ऐसी परियोजनाओं में बिजली की कीमत तय करते समय केवल उत्पादन लागत ही नहीं, बल्कि प्लांट की स्थापना, कचरा प्रबंधन, तकनीक, वित्तीय लागत और दीर्घकालिक अनुबंध जैसी चीजें भी शामिल होती हैं। इसलिए इसकी तुलना सीधे भारत से आयातित सामान्य ग्रिड बिजली की दर से करना पूरी तरह समान तुलना नहीं माना जा सकता।

भारत-बांग्लादेश बिजली संबंध क्यों अहम?

भारत और बांग्लादेश के बीच बिजली व्यापार पिछले वर्षों में काफी बढ़ा है। अदाणी के गोड्डा प्लांट से बांग्लादेश को बिजली की आपूर्ति 2023 में शुरू हुई थी। बाद में भारतीय बिजली निर्यात का बांग्लादेश के कुल बिजली मिश्रण में हिस्सा भी बढ़ा।

हालांकि, बांग्लादेश में अदाणी पावर समझौते की कीमत को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। जनवरी 2026 में बांग्लादेश की सरकारी समिति ने आरोप लगाया था कि इस सौदे में बिजली की कीमत बाजार के मुकाबले अधिक है और समझौते में प्रक्रियागत खामियां भी थीं।

इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि बांग्लादेश के लिए बिजली खरीद अब सिर्फ ऊर्जा जरूरत का विषय नहीं रह गई है। इसमें कीमत, ऊर्जा सुरक्षा, विदेशी निवेश और भारत-चीन के साथ आर्थिक संबंध भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।


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