सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : अरब में जंग लंबी खिंचने के संकेत, अमेरिका ने बनाया 2027 तक का प्लान वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव के बीच अमेरिकी प्रशासन ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी को लंबे समय तक बनाए रखने की तैयारी शुरू कर दी है। रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने क्षेत्र में तैनात कुछ अमेरिकी सैन्य इकाइयों की तैनाती को 2027 तक बढ़ाने का फैसला किया है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका ईरान के साथ संघर्ष के लंबे समय तक चलने की संभावना को ध्यान में रखकर अपनी रणनीति तैयार कर रहा है।
2027 तक सैनिकों की तैनाती रिपोर्ट के अनुसार 14 अगस्त के आदेशों में मध्य पूर्व में तैनात कुछ अमेरिकी सैनिकों को सितंबर तक और कुछ अन्य सैन्य इकाइयों को 2027 तक क्षेत्र में बनाए रखने की योजना का उल्लेख किया गया था। इस फैसले ने अमेरिकी सैन्य नेतृत्व के भीतर भी चिंता पैदा की है, क्योंकि लंबे समय तक तैनाती से सैनिकों, हथियारों और सैन्य संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है।
क्या 2027 तक चलेगी जंग? अमेरिकी सैनिकों की तैनाती बढ़ाए जाने का अर्थ यह नहीं है कि अमेरिका ने आधिकारिक रूप से 2027 तक युद्ध जारी रखने का फैसला कर लिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से संघर्ष को जल्द समाप्त करने की उम्मीद भी जताई गई है। लेकिन सैन्य तैनाती को आगे बढ़ाने का फैसला यह बताता है कि पेंटागन लंबे समय तक किसी भी संभावित सैन्य स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहना चाहता है।
सैन्य नेतृत्व ने जताई चिंता अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के एक वर्ग ने लंबे समय तक ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान जारी रखने को लेकर चिंता जताई है। उनका तर्क है कि लगातार मध्य पूर्व में बड़ी संख्या में सैनिक और सैन्य संसाधन लगाए रखने से दूसरे क्षेत्रों में अमेरिकी सैन्य तैयारियों पर असर पड़ सकता है। कुछ अधिकारियों ने इसे ऑपरेशनल क्षमता और संसाधनों पर बढ़ते दबाव से जोड़कर देखा है।
मध्य पूर्व में बढ़ा सैन्य दबाव ईरान के साथ संघर्ष के कारण अमेरिका ने क्षेत्र में बड़ी संख्या में सैनिक, एयर डिफेंस सिस्टम, युद्धपोत और अन्य सैन्य संसाधन तैनात किए हैं। अमेरिकी सैन्य मौजूदगी का उद्देश्य ईरान की सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने के साथ-साथ क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है।
हालिया घटनाक्रम में अमेरिका और ईरान के बीच हमले और जवाबी हमले जारी रहे हैं। इसके चलते खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ा है और ऊर्जा आपूर्ति तथा शिपिंग पर भी असर की आशंका बनी हुई है। रॉयटर्स के मुताबिक संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है और तेल बाजार भी घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।
ट्रंप प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती एक तरफ अमेरिकी प्रशासन संघर्ष को नियंत्रित करने और ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ सैन्य विकल्प खुले रखे गए हैं। ऐसे में 2027 तक सैन्य तैनाती बढ़ाने की खबर बताती है कि वॉशिंगटन किसी भी संभावित लंबे संघर्ष या क्षेत्रीय अस्थिरता से निपटने के लिए अपनी सैन्य क्षमता को तैयार रखना चाहता है।
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि मध्य पूर्व की मौजूदा जंग निश्चित रूप से 2027 तक चलेगी। लेकिन अमेरिकी सेना की विस्तारित तैनाती ने इस संभावना को लेकर बहस जरूर तेज कर दी है कि ईरान के साथ टकराव जल्द खत्म होने के बजाय लंबे समय तक अमेरिकी विदेश और रक्षा नीति का प्रमुख मुद्दा बना रह सकता है।
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