सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : 'ब्याज कम करो, वरना रोक दूंगा व्यापार', ट्रंप की फेड को चेतावनी

अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फेडरल रिजर्व के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। ट्रंप ने फेडरल रिजर्व से ब्याज दरें कम करने की मांग करते हुए बेहद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर दरें कम नहीं की गईं तो अमेरिका उन देशों के साथ व्यापार रोक सकता है, जिनके साथ उसका व्यापार घाटा है।

ट्रंप क्यों चाहते हैं ब्याज दरों में कटौती? ट्रंप का तर्क है कि ऊंची ब्याज दरें अमेरिकी अर्थव्यवस्था को प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान पहुंचाती हैं। कम ब्याज दर से कंपनियों और उपभोक्ताओं के लिए कर्ज सस्ता हो सकता है, जिससे निवेश और खर्च को बढ़ावा मिल सकता है। ट्रंप ने अमेरिका के लिए दुनिया की सबसे कम ब्याज दरों में से एक की वकालत की है। उनका मानना है कि इससे अमेरिकी कारोबार को फायदा मिलेगा और सरकार के लिए कर्ज की लागत भी कम हो सकती है।

मजबूत जॉब रिपोर्ट ने बढ़ाई मुश्किल ट्रंप की मांग ऐसे समय आई है जब अगस्त की अमेरिकी रोजगार रिपोर्ट उम्मीद से काफी मजबूत रही। अगस्त 2026 में अमेरिका में 1.62 लाख नौकरियां बढ़ीं, जो अर्थशास्त्रियों के अनुमान से काफी अधिक थीं। बेरोजगारी दर 4.1% पर रही। मजबूत रोजगार आंकड़े महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा सकते हैं और फेड के लिए ब्याज दरें घटाने के बजाय उन्हें बढ़ाने का तर्क मजबूत कर सकते हैं। यही वजह है कि बाजार में सितंबर की फेड बैठक को लेकर दरों में बढ़ोतरी की संभावना पर चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्टों के अनुसार, मजबूत रोजगार आंकड़ों के बाद ऐसी संभावना बढ़ी है कि फेड महंगाई पर नियंत्रण के लिए सख्त रुख अपना सकता है।

फेड की स्वतंत्रता पर सवाल अमेरिका का फेडरल रिजर्व मौद्रिक नीति तय करने वाली स्वतंत्र संस्था है। ब्याज दरों का फैसला मुख्य रूप से महंगाई, रोजगार और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए किया जाता है। राष्ट्रपति की राजनीतिक इच्छा के आधार पर दरें तय करना केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकता है। ट्रंप का फेड पर दबाव पहले भी अमेरिकी राजनीति और अर्थव्यवस्था में बहस का विषय रहा है। इस बार व्यापार नीति को ब्याज दरों से जोड़ने की उनकी धमकी ने इस बहस को और गंभीर बना दिया है।

'दरें कम नहीं हुईं तो व्यापार रोक दूंगा' ट्रंप ने सोशल मीडिया पर फेड को दरें कम करने का दबाव देते हुए कहा कि अमेरिका को ऊंची ब्याज दरों के कारण वैश्विक स्तर पर नुकसान हो रहा है। उन्होंने व्यापार घाटे वाले देशों के साथ व्यापार रोकने की चेतावनी भी दी। हालांकि, ऐसी कार्रवाई का वैश्विक व्यापार और अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक व्यापार पर इस तरह की व्यापक रोक आर्थिक गतिविधियों को नुकसान पहुंचा सकती है और मंदी का जोखिम बढ़ा सकती है।

आगे क्या होगा? अब निगाहें फेडरल रिजर्व की सितंबर की बैठक पर हैं। फेड के सामने एक तरफ मजबूत रोजगार बाजार है, जबकि दूसरी तरफ महंगाई को नियंत्रित करने की चुनौती है। ऐसे माहौल में ट्रंप की ब्याज दर घटाने की मांग और फेड की स्वतंत्र मौद्रिक नीति के बीच टकराव आने वाले दिनों में अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है।


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