सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : नई दिल्ली। त्योहारी सीजन में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आकर्षक छूट और विशेष डील की भरमार के बीच उपभोक्ताओं को फर्जी ऑफर और धोखाधड़ी वाले शॉपिंग लिंक से सतर्क रहने की सलाह दी गई है। साइबर अपराधी अक्सर फेस्टिव सेल के उत्साह का फायदा उठाकर भ्रामक विज्ञापन, नकली वेबसाइट और असामान्य रूप से भारी छूट का दावा करने वाले संदेश तैयार करते हैं। ऐसे में अनजान खरीदार पैसे गंवा सकते हैं या अपनी संवेदनशील वित्तीय जानकारी उजागर कर बैठते हैं।

ऐसी डील से सावधान रहें, जो असामान्य रूप से आकर्षक लगे

ठग सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप, ईमेल और टेक्स्ट मैसेज के जरिए फर्जी ऑफर फैला सकते हैं। ये प्रचार सामग्री कई बार नामी शॉपिंग ब्रांड जैसी दिखती है और उपयोगकर्ताओं को ऐसी वेबसाइट पर ले जाती है, जिनका मकसद भुगतान विवरण, पासवर्ड या वन-टाइम पासवर्ड (OTP) चुराना होता है। जो ऑफर तत्काल भुगतान मांगते हों या यह दावा करते हों कि डील कुछ ही मिनटों में खत्म हो जाएगी, उन्हें सावधानी से देखना चाहिए।

उपभोक्ताओं को किसी भी प्रचार ऑफर की पुष्टि सीधे संबंधित रिटेलर की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप से करनी चाहिए। वेबसाइट का पता ध्यान से जांचना और अनजान लिंक से बचना ऑनलाइन धोखाधड़ी के जोखिम को कम कर सकता है।

बैंकिंग और व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित रखें

खरीदारों को अपना OTP, UPI PIN, बैंकिंग पासवर्ड या कार्ड सुरक्षा से जुड़ी जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। वैध भुगतान प्रक्रिया में रिफंड पाने या डिस्काउंट क्लेम करने के लिए UPI PIN बताने की जरूरत नहीं होती। सुरक्षित भुगतान विकल्पों का उपयोग, ट्रांजैक्शन अलर्ट चालू रखना और बैंक स्टेटमेंट में अनजान लेनदेन की नियमित जांच करना भी जरूरी है।

उपभोक्ताओं को ऐसे अनजान कॉलर के कहने पर कोई ऐप इंस्टॉल नहीं करना चाहिए और न ही स्क्रीन-शेयरिंग एक्सेस देना चाहिए, जो शॉपिंग सहायता या रिफंड देने का दावा कर रहे हों।

धोखाधड़ी का संदेह हो तो क्या करें

यदि संदिग्ध साइबर अपराध में पैसा चला गया है, तो लेनदेन की सूचना देने के लिए तुरंत बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता से संपर्क करें। भारत में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत 1930 पर कॉल कर या National Cyber Crime Reporting Portal के जरिए दर्ज कराई जा सकती है। जल्दी रिपोर्ट करने से अधिकारियों को ट्रांसफर की गई रकम का पता लगाने या उसे रोकने की कार्रवाई शुरू करने में मदद मिल सकती है, हालांकि रकम वापस मिलने की गारंटी नहीं होती।

किसी लिंक पर क्लिक करने या भुगतान करने से पहले थोड़ी सावधानी उपभोक्ताओं को त्योहारी खरीदारी का आनंद लेते हुए अपना पैसा और व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित रखने में मदद कर सकती है।


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